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MP के इस शहर में बनने जा रहा 300 करोड़ का चिड़ियाघर, अनंत अंबानी की टीम ने डीपीआर को लेकर किया निरीक्षण

MP News: उज्जैन में चिड़ियाघर-सह-सफारी केंद्र की स्थापना के लिए विस्तृत कार्य योजना (डीपीआर) रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी...और पढ़ें

By Dheeraj GomeEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Fri, 07 Nov 2025 08:10:32 PM (IST)Updated Date: Fri, 07 Nov 2025 08:10:32 PM (IST)
MP के इस शहर में बनने जा रहा 300 करोड़ का चिड़ियाघर, अनंत अंबानी की टीम ने डीपीआर को लेकर किया निरीक्षण
निरीक्षण करने आई अनंत अंबानी की की टीम।

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। उज्जैन में चिड़ियाघर-सह-सफारी केंद्र की स्थापना के लिए विस्तृत कार्य योजना (डीपीआर) रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी की ‘ग्रीन्स जूलाजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर समिति’ बना रही है। तैयारियों को लेकर उनकी टीम ने योजना के लिए चिह्नित मक्सी रोड स्थित 80 हेक्टेयर में फैली नौलखी बीड का निरीक्षण किया। डीएफओ अनुराग तिवारी को आश्वस्त किया कि वे शीघ्र ही डीपीआर बनाकर प्रस्तुत करेंगे।

80 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होगा चिड़ियाघर

बता दें कि कि महत्वाकांक्षी परियोजना लगभग 300 करोड़ रुपये से 80 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होगी। इसके लिए 25 करोड़ रुपये की प्रारंभिक राशि मंजूर भी जा चुकी है। प्रस्तावित योजना के अनुसार नौलखी बीड पर बनने वाले इस चिड़ियाघर-सफारी में बाघ, सफेद बाघ, तेंदुआ, चीता सहित बड़े जीवों के लिए 47 विशेष बाड़े होंगे। साथ ही छोटी प्रजातियां, पक्षी, प्राइमेट, सरीसृप, एक तितली गुंबद, मछली घर, बचाव केंद्र और पशु चिकित्सा अस्पताल की भी व्यवस्था रहेगी। यह परियोजना प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के प्रमुख वन्यजीव संरक्षण स्थलों में शुमार हो सकेगी।


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एमओयू पर हुए हस्ताक्षर

इसी वर्ष 29 अगस्त को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में मध्य प्रदेश टाइगर फाउंडेशन समिति और ग्रीन्स जूलाजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर समिति के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) हस्ताक्षरित हुआ। इस एमओयू के माध्यम से वन्यजीवों के पुनर्वास, संरक्षण, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए संयुक्त प्रयास किए जाएंगे। एमओयू के तहत चिड़ियाघरों और रेस्क्यू सेंटर्स के लिए तकनीकी सहायता, वन कर्मियों, पशु चिकित्सकों और महावतों का कौशल उन्नयन, आधुनिक पशु चिकित्सा अस्पताल और प्रयोगशालाओं का विकास किया जाएगा। खास तौर पर ग्रीन्स सेंटर की उन्नत प्रयोगशालाओं से बाघों की आबादी का आणविक आनुवंशिक विश्लेषण संभव होगा, जिससे संरक्षण योजनाओं को वैज्ञानिक मजबूती मिलेगी।