
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : सड़क हादसे में घायल व्यक्ति के लिए शुरुआती कुछ मिनट बेहद अहम होते हैं। इस दौरान मदद मिल जाए तो उसकी जान बचाने की संभावना बढ़ सकती है। लेकिन अक्सर दुर्घटना के बाद एंबुलेंस या चिकित्सा सहायता पहुंचने तक घायल को इंतजार करना पड़ता है। इसी स्थिति को बदलने के लिए उज्जैन में राजमार्गों से लगी ग्राम पंचायतों के लोगों को जन सेवा प्रहरी बनाया जा रहा है।
ये वे स्थानीय लोग होंगे, जो हादसा होने पर सबसे पहले मदद के लिए आगे आ सकेंगे। शनिवार को देवास-उज्जैन राजमार्ग से जुड़ी ग्राम पंचायतों के करीब 180 वालंटियर्स को प्राथमिक उपचार और आपातकालीन सहायता का प्रशिक्षण दिया गया। इससे पहले इंदौर-उज्जैन राजमार्ग की ग्राम पंचायतों के 150 से अधिक वालंटियर्स को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इस तरह दोनों मार्गों पर 330 से अधिक लोगों को दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए तैयार करने की पहल की गई है।
दुर्घटना के बाद घायल को अस्पताल पहुंचाना जितना जरूरी है, उतना ही महत्वपूर्ण है कि मदद पहुंचने तक उसे उचित प्राथमिक सहायता मिले। जन सेवा प्रहरी अभियान में इसी बात पर जोर दिया जा रहा है। शनिवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में हुए प्रशिक्षण में स्वास्थ्य, परिवहन और पुलिस विभाग के अधिकारियों ने वालंटियर्स को दुर्घटना के समय बरती जाने वाली सावधानियों, प्राथमिक उपचार और संबंधित विभागों से संपर्क करने की प्रक्रिया समझाई।
इन प्रहरियों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से फर्स्ट एड बॉक्स भी दिए जा रहे हैं। प्रशिक्षण पूरा करने वालों को परिचय पत्र और प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इससे जरूरत पड़ने पर उनकी पहचान और विभागों के साथ समन्वय आसान होगा।
राजमार्गों से लगी ग्राम पंचायतों में रहने वाले लोगों को इस अभियान से जोड़ने का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर मददगारों की उपलब्धता बढ़ाना है। दुर्घटना के समय आसपास मौजूद प्रशिक्षित व्यक्ति तत्काल सहायता की पहल कर सकता है और पुलिस तथा स्वास्थ्य विभाग को सूचना देकर चिकित्सा मदद जुटाने में सहयोग कर सकता है। इससे प्रशासनिक और चिकित्सा सहायता पहुंचने तक का समय अधिक उपयोगी बनाया जा सकेगा। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के मार्गदर्शन में संचालित इस अभियान में जनपद पंचायत उज्जैन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं वरिष्ठ प्रशिक्षक अंकित बिसेन प्रशिक्षण की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
दो प्रमुख राजमार्गों से जुड़ी ग्राम पंचायतों में 330 से अधिक वालंटियर्स को प्रशिक्षण दिया जाना पहल का महत्वपूर्ण पड़ाव है। हालांकि, अभियान की असली सफलता इस बात से तय होगी कि दुर्घटना के समय ये प्रहरी कितनी जल्दी सक्रिय होते हैं और घायलों को सुरक्षित तरीके से सहायता कैसे उपलब्ध कराते हैं। प्राथमिक उपचार के साथ एंबुलेंस, पुलिस और अस्पताल के बीच बेहतर समन्वय बने तो यह व्यवस्था सड़क हादसों में घायल लोगों के लिए बड़ा सहारा बन सकती है।
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