
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर सप्ताहभर से हड़ताल कर धरने पर बैठे शासकीय धन्वंतरि आयुर्वेद महाविद्यालय के इंटर्नशिप कर रहे छात्रों का आंदोलन सोमवार को तेज हो गया। उन्होंने सुबह 7 बजे चिमनगंज थाने के समीप स्थित धन्वंतरि आयुर्वेद अस्पताल के मुख्य गेट एवं ओपीडी पर ताला लगा दिया और मरीजों की एंट्री बंद कर दी।
इस दौरान विद्यार्थियों ने जमकर नारेबाजी की। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. ओपी व्यास और पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर विद्यार्थियों से चर्चा की। समझाइश के बाद दोपहर 12 बजे विद्यार्थियों ने ताला खोला।
विद्यार्थियों का कहना है कि मांग लंबे समय से उठाई जा रही है, लेकिन अब तक ठोस निर्णय नहीं हुआ। उन्होंने कहा जब काम और जिम्मेदारी समान हैं, तो स्टाइपेंड में इतना अंतर क्यों। विद्यार्थियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें अब केवल मौखिक आश्वासन नहीं, बल्कि मांग पूरी करने का लिखित आदेश चाहिए।
मालूम हो कि विद्यार्थी, पिछले सोमवार से तख्तियां लेकर अस्पताल के बाहर धरना दे रहे हैं। सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए उन्होंने ज्ञापन दिया, सद्बुद्धि यज्ञ किया, रक्तदान किया और अन्य कई जतन किए। इसके बावजूद मांग पर निर्णय नहीं होने से उन्हें तालाबंदी का कदम उठाना पड़ा। विद्यार्थियों ने चेतावनी दी कि वे दो दिन तक सरकार की प्रतिक्रिया देखेंगे। इसके बाद भी ठोस पहल नहीं हुई तो प्रदेशभर के आयुर्वेद विद्यार्थियों को उज्जैन में जुटाकर बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।
विद्यार्थियों के आंदोलन का प्रमुख आधार एलोपैथी और आयुर्वेद इंटर्न के स्टाइपेंड में अंतर है। उनका कहना है कि सरकार ने हाल ही में एमबीबीएस इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ाकर 22 हजार रुपये कर दिया है, जबकि आयुर्वेद इंटर्न को अब भी 9383 रुपये ही मिल रहे हैं। यानी दोनों के बीच हर महीने 12,617 रुपये का अंतर है।
विद्यार्थियों ने दूसरे राज्यों का उदाहरण देते हुए बताया कि उनके अनुसार दिल्ली में आयुर्वेद इंटर्न को 2350 रुपये, बिहार में 27 हजार रुपये और तेलंगाना में 29,792 रुपये स्टाइपेंड दिया जा रहा है। उनका दावा है कि मध्यप्रदेश में आयुर्वेद विद्यार्थियों को मिलने वाला स्टाइपेंड सबसे कम है।
तालाबंदी के दौरान अस्पताल पहुंचे मरीजों को इलाज के लिए परेशानी उठानी पड़ी। छह घंटे तक मुख्य गेट बंद रहने से अस्पताल की सेवाएं प्रभावित हुईं। अब सवाल यह है कि सप्ताहभर के धरने, यज्ञ, रक्तदान शिविर और तालाबंदी के बाद सरकार विद्यार्थियों की मांग पर क्या निर्णय लेती है। विद्यार्थियों ने साफ कर दिया है कि आश्वासन से आंदोलन नहीं रुकेगा, उन्हें लिखित आदेश चाहिए।
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