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Bhagat Singh Jayanti: उज्जैन में भगत सिंह की मां ने कहा था- मुझे बेटा वापस मिल गया

भगत सिंह जयंती 2026 : श्रीकृष्ण सरल ‘सरदार भगत सिंह’ महाकाव्य मां विद्यावती को भेंट करने लगे तो उन्होंने अगला महाकाव्य चंद्रशेखर आजाद पर लिखने की शर्त...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Mon, 28 Sep 2026 08:21:00 AM (IST)Updated Date: Mon, 28 Sep 2026 08:34:55 AM (IST)
Bhagat Singh Jayanti: उज्जैन में भगत सिंह की मां ने कहा था- मुझे बेटा वापस मिल गया
भगत सिंह और उनकी माता विद्यावती देवी की तस्वीर।

HighLights

  1. श्रीकृष्ण सरल के भगत सिंह के कार्यों पर लिखा था महाकाव्य
  2. मां विद्यावती देवी ने उज्जैन में किया था इस महाकाव्य का लोकार्पण
  3. बोली थीं- बेटे को लाहौर में खोया था, उज्जैन में ग्रंथ के रूप पा लिया

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। बलिदानी भगत सिंह का नाम देश के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में दर्ज है, लेकिन मालवा की धरती से जुड़ी उनकी स्मृति का एक भावुक अध्याय उज्जैन में लिखा गया था। नौ मार्च 1965 को भगत सिंह की मां विद्यावती देवी स्वयं उज्जैन पहुंची थीं। अवसर था राष्ट्रकवि श्रीकृष्ण सरल के भगत सिंह के कार्यों पर रचे महाकाव्य ‘सरदार भगत सिंह’ के लोकार्पण का।

छत्रीचौक के पार्क में हुए इस आयोजन में हजारों लोग जुटे थे। राष्ट्रकवि श्रीकृष्ण सरल साहित्य समिति की वेबसाइट पर प्रकाशित डॉ. रमेश चंद्र के संस्मरण के अनुसार, उस समय लगभग 20 से 22 हजार लोग मां विद्यावती के सम्मान में उपस्थित थे।


मंच पर विद्यावती देवी, उनकी बहू और श्रीकृष्ण सरल सहित अन्य अतिथि मौजूद थे। जब लोगों ने विद्यावती पर फूल बरसाए तो सरल ने उन्हें रोकना चाहा। इस पर विद्यावती ने कहा कि भगत सिंह के नाम पर बरसाया गया पत्थर भी उन्हें फूल जैसा लगेगा।

महाकाव्य स्वीकार करने से पहले रखी शर्त

कार्यक्रम में जब श्रीकृष्ण सरल ‘सरदार भगत सिंह’ महाकाव्य मां विद्यावती को भेंट करने लगे तो उन्होंने उसे स्वीकार करने से पहले एक शर्त रख दी। उनका कहना था कि भगत सिंह से पहले चंद्रशेखर आजाद बलिदान हुए थे, इसलिए सरल को अगला महाकाव्य आजाद पर लिखने का वचन देना होगा।

इसके बाद सरल ने एक सिख सज्जन से कटार लेकर अपने अंगूठे पर चीरा लगाया और उसी रक्त से विद्यावती के मस्तक पर तिलक लगाकर वचन दिया कि अगला महाकाव्य चंद्रशेखर आजाद पर ही लिखेंगे। संस्मरण के अनुसार सरल ने एक वर्ष के भीतर महाकाव्य लिखकर प्रकाशित कराया और विद्यावती देवी को समर्पित कर अपना वचन पूरा किया।

‘लाहौर में खोया उज्जैन में मिला’

महाकाव्य के लोकार्पण के बाद विद्यावती ने भावुक होकर कहा था कि जिस बेटे को उन्होंने लाहौर में खोया था, उसे उज्जैन में ग्रंथ के रूप में पा लिया। उन्हें ऐसा लगा जैसे भगत सिंह फिर उनकी गोद में आकर उनसे बातें कर रहा हो।

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