
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : 255 करोड़ रुपये से बनने वाले तीन लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के अत्याधुनिक डेयरी प्लांट का शनिवार को डिजिटल भूमिपूजन हुआ। प्लांट की खासियत केवल इसकी क्षमता नहीं, बल्कि यह है कि दूध की पूरी वैल्यू चेन उज्जैन में मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
पैक्ड मिल्क से लेकर दही, लस्सी-छाछ और घी तक तैयार होगा। भविष्य में क्षमता पांच लाख लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाई जा सकेगी। इसका सबसे बड़ा आधार खुद उज्जैन का मौजूदा दुग्ध कारोबार है। उज्जैन सहकारी दुग्ध संघ से करीब 73 हजार दुग्ध उत्पादक जुड़े हैं और वर्ष 2025-26 में प्रतिदिन 4.11 लाख लीटर दूध संग्रहण का लक्ष्य रखा गया था। ऐसे में नई प्रोसेसिंग क्षमता केवल एक नया प्लांट नहीं, बल्कि पहले से मौजूद बड़े दुग्ध नेटवर्क को आगे बढ़ाने वाला ढांचा है।
मालूम हो कि डेयरी कारोबार का असली खेल दूध बेचने से आगे शुरू होता है। एक ही दूध को पैक्ड मिल्क, दही, छाछ, लस्सी और घी जैसे उत्पादों में बदलने पर उसके लिए अलग-अलग बाजार बनते हैं। यही मूल्यवर्धन किसान से लेकर सहकारी संस्था और बाजार तक पूरी श्रृंखला को मजबूत करता है।
नए प्लांट में प्रतिदिन 1.50 लाख लीटर पैक्ड मिल्क, 25 हजार लीटर दही और 10 हजार लीटर लस्सी-छाछ बनाने की क्षमता प्रस्तावित है। इसके अलावा 10 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता का घी प्लांट भी होगा। यानी उज्जैन में दूध आएगा, प्रोसेस होगा और यहीं से अलग-अलग बाजारों के लिए उत्पाद के रूप में निकलेगा।
यही कारण है कि किसान इसे केवल सरकारी निर्माण परियोजना के रूप में नहीं देख रहे। उज्जैन के किसान राम पाटीदार कहते हैं कि बड़े प्लांट से दूध का बाजार बढ़ेगा तो युवाओं के लिए पशुपालन को व्यवसाय के रूप में अपनाने की संभावना बढ़ेगी।
उनका कहना है कि डेयरी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से दूध के फैट के भाव में भी सुधार की उम्मीद है। कानीपुरा निवासी राहुल जाट के अनुसार, बड़े स्तर की प्रोसेसिंग सुविधा आने से क्षेत्र के किसानों को दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए बाजार का भरोसा मिलेगा।
उनके अनुसार उज्जैन में यह परियोजना पशुपालन आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को विस्तार देने वाली है। उज्जैन की पहचान धार्मिक नगरी के रूप में देशभर में है। सिंहस्थ 2028 के लिए शहर में बड़े पैमाने पर अधोसंरचना तैयार हो रही है। इसी दौर में डेयरी प्लांट शहर की आर्थिक पहचान में एक नया अध्याय जोड़ सकता है।
यदि दूध संग्रहण, प्रोसेसिंग और बाजार समान गति से बढ़ते हैं तो आने वाले वर्षों में उज्जैन की पहचान केवल दूध पैदा करने वाले क्षेत्र की नहीं, बल्कि दूध को बड़े पैमाने पर उत्पादों में बदलने वाले डेयरी केंद्र की बन सकती है। किसान के लिए इसका मतलब है बाजार, पशुपालक के लिए कारोबार, युवा के लिए अवसर, उपभोक्ता के लिए स्थानीय उत्पाद और उज्जैन के लिए एक नई आर्थिक पहचान। 255 करोड़ की इस परियोजना का असली महत्व इसी पूरी श्रृंखला में छिपा है।
दुग्ध संघ का 2025-26 का प्रतिदिन दूध संग्रहण लक्ष्य 4.11 लाख लीटर था। नई परियोजना में शुरुआत में तीन लाख लीटर प्रतिदिन की प्रोसेसिंग क्षमता होगी। यानी नई क्षमता उज्जैन के मौजूदा संग्रहण लक्ष्य की करीब तीन-चौथाई है। भविष्य में इसे पांच लाख लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाने की योजना है। यह क्षमता बढ़ने के साथ दूध संग्रहण नेटवर्क के विस्तार और नए उत्पादों के बाजार को भी बढ़ाने का आधार तैयार कर सकती है।