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उज्जैन के कालभैरव मंदिर में भक्त खिड़की खुलने का कर रहे इंतजार, रसूखदारों के प्वाइंट फोन पर हो रहे क्लियर

भक्त 500 रुपये का शुल्क चुकाकर अगर शीघ्र दर्शन करना चाहें, तो वह भी संभव नहीं हो पा रहा है। दिन में अधिकांश समय टिकट काउंटर बंद रहता है। भक्त खिड़की ख...और पढ़ें

By Rajesh VermaEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Tue, 09 Jun 2026 10:54:01 AM (IST)Updated Date: Tue, 09 Jun 2026 01:26:29 PM (IST)
उज्जैन के कालभैरव मंदिर में भक्त खिड़की खुलने का कर रहे इंतजार, रसूखदारों के प्वाइंट फोन पर हो रहे क्लियर
रसूखदारों को फोन पर निर्गम द्वार से दिया जा रहा प्रवेश और दर्शनार्थियों की कतार में बैरिकेड पर खड़े होकर पानी की बोतल बेचता युवक। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. कालभैरव मंदिर: गार्ड बोला- पहचान हो तो आप भी फोन लगा लो, वर्ना गेट छोड़ दो
  2. भक्त 500 रुपये का शुल्क चुकाकर अगर शीघ्र दर्शन करना चाहें, तो वह भी संभव नहीं हो पा रहा है
  3. भक्त खिड़की खुलने के इंतजार में घंटों काउंटर पर खड़े रहते हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। कालभैरव मंदिर में आम भक्तों की जमकर फजीहत हो रही है। सामान्य दर्शनार्थियों को भगवान कालभैरव के दर्शन में तीन से चार घंटे का समय लग रहा है। भक्त 500 रुपये का शुल्क चुकाकर अगर शीघ्र दर्शन करना चाहें, तो वह भी संभव नहीं हो पा रहा है। दिन में अधिकांश समय टिकट काउंटर बंद रहता है। भक्त खिड़की खुलने के इंतजार में घंटों काउंटर पर खड़े रहते हैं। इधर निर्गम द्वार पर रसूखदारों के पाइंट फोन पर मिनटों में क्लियर हो जाते हैं।

मंदिर में भक्तों के साथ हो रही इस धांधली को जानने और समझने के लिए नईदुनिया की टीम मंगलवार को कालभैरव मंदिर गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। भक्तों को रुपये देने के बावजूद टिकट नहीं मिल पाना और रसूखदारों को फोन पर वीआइपी प्रवेश कैसे हो रहा है यह समझने के लिए निर्गम द्वार पर तैनात गार्डों से पूछताछ की। गार्ड का जवाब था कि आपकी एसडीएम, पटवारी से पहचान है तो आप भी फोन लगवा लो, वर्ना गेट छोड़कर साइड में खड़े हो जाओ।


बिचौलिए सक्रिय

सूत्र बताते हैं कालभैरव की दर्शन व्यवस्था में बिचौलिए सक्रिय हैं। शीघ्र दर्शन काउंटर खुला रहने पर दर्शनार्थी टिकट खरीदते हैं और सीधे मंदिर में प्रवेश कर जाते हैं। ऐसे में दलालों का धंधा मंदा पड़ जता है और यह लोग येनकेन प्रकारेण व्यवस्था में हस्तक्षेप कर काउंटर बंद करा देते हैं। इधर जिम्मेदार भी भीड़ अधिक होने तथा व्यवस्था बिगड़ने का डर दिखाकर टिकट काउंटर बंद कर देते हैं। इसके बाद फोन पर पाइंट क्लियर करने का काम शुरू हो जाता है। गार्डों को अफसरों की इतनी शह है कि वे अपमान जनक तरीके से धमकाने वाली भाषा में बात करते हैं। बात दें मंदिर में भक्तों की सुविधा के लिए भी कोई इंतजाम नहीं है।

कंटेनर को बनाया काउंटर, भीतर गंदगी

जिला प्रशासन ने कालभैरव मंदिर के निर्गम द्वार के समीप लोहे के कंटेनर में टिकट काउंटर बनाया है। इसमें दो खिड़की है। अंदर की बदहाली देखकर लगता है, काउंटर कम खुलता है और प्रोटोकाल दर्शन की सारी व्यवस्था फोन पर चलती है। जिला प्रशासन के आला अधिकारी भी इस और ध्यान नहीं दे रहे हैं।

पेयजल के इंतजाम नहीं, खरीदकर पीना पड़ रहा

कालभैरव मंदिर परिक्षेत्र में कहीं भी भक्तों के लिए पेयजल के इंतजाम नजर नहीं आए। दर्शनार्थी भीषण गर्मी में पानी को तरसे हुए दर्शन की कतार में खड़े थे। आसपास के दुकानदार दर्शन की कतार में अलग-अलग स्थानों पर बैरिकेड पर चढ़कर ठंडे पानी की बोतलें बेच रहे थे। भक्तों को खरीदकर पानी पीना पड़ रहा था।

छांव के इंतजाम नहीं, पेड़ बने आसरा

कालभैरव मंदिर में भक्तों के लिए छांव के इंतजाम भी नहीं है। भक्तों को चिलचिलाती धूप व झुलसा देने वाली गर्मी में दर्शन की कतार में खड़े रहना पड़ रहा है। मंदिर प्रशासन ने मेटिन के इतंजाम भी नहीं किए हैं। धूप व गर्मी से परेशान भक्तों को मंदिर के आसपास पेड़ों की छांव में आसरा लेना पड़ रहा है।

जूता स्टैंड की व्यवस्था भी बदहाल

कालभैरव मंदिर में दो से तीन स्थानों पर जूता चप्पल स्टैंड बनाए गए हैं। लेकिन सभी की व्यवस्था चौपट है। जूता स्टैंड के बाहर ही जूते चप्पलों के ढेर लगे हुए हैं। अफसरों का ध्यान मंदिर के बाहर की व्यवस्थाओं पर बिल्कुल नहीं है। सूत्र बताते हैं गर्भगृह में कितने लोग पहुंच रहे हैं जिम्मेदार दिनभर इसी का हिसाब किताब लगाते रहते हैं।

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