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सिंहस्थ की बायपास रेलवे लाइन पर किसानों का विरोध, सर्वे किए बिना लौटी रेलवे-राजस्व की टीम

सिंहस्थ-2028 के दौरान उज्जैन रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का दबाव कम करने के लिए प्रस्तावित 189 करोड़ रुपये की रेल बायपास परियोजना को जमीन पर उतारने से पहले ही विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

By Amit AtalasiaEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Sat, 07 Nov 2026 05:41:54 PM (IST)Updated Date: Sat, 07 Nov 2026 05:45:04 PM (IST)
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सिंहस्थ की बायपास रेलवे लाइन पर किसानों का विरोध, सर्वे किए बिना लौटी रेलवे-राजस्व की टीम
सर्वे के लिए आई टीम का विरोध करते हुए किसान।

HighLights

  1. 189 करोड़ के रेल बायपास प्रोजेक्ट पर ब्रेक
  2. सर्वे टीम को किसानों ने घेरा
  3. बिना काम बैरंग लौटी रेलवे व राजस्व टीम

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। सिंहस्थ-2028 के दौरान उज्जैन रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का दबाव कम करने के लिए प्रस्तावित 189 करोड़ रुपये की रेल बायपास परियोजना को जमीन पर उतारने से पहले ही विरोध का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार को नईखेड़ी से चिंतामन तक प्रस्तावित 8.60 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का सर्वे करने पहुंची रेलवे और राजस्व विभाग की टीम को किसानों के विरोध के चलते बिना काम किए लौटना पड़ा। किसानों ने टीम को घेरकर पहले जमीन अधिग्रहण, अलाइनमेंट और मुआवजे का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की।

किसानों का कहना है कि रेलवे ने अब तक चार-पांच बार रेल लाइन का अलाइनमेंट बदला है। पहले ऐसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा था, जिनमें कम जमीन अधिग्रहित होती, लेकिन अब प्रस्तावित पटरी उनके खेतों से होकर निकाली जा रही है। पांच गांवों के 85 सर्वे नंबरों की जमीन अधिग्रहण के लिए चिह्नित की जा रही है। किसानों की सबसे बड़ी आपत्ति मुआवजे की दर को लेकर है। उनका दावा है कि क्षेत्र में जमीन का बाजार मूल्य तीन से चार करोड़ रुपये प्रति बीघा है, जबकि गाइडलाइन के आधार पर करीब 60 लाख रुपये प्रति बीघा मुआवजा मिलने की बात कही जा रही है।


पहले रूट और मुआवजे का हिसाब बताएं, फिर दिखाएंगे जमीन

किसान जीतसिंह फौजी ने बताया कि शुक्रवार को प्रशासन और रेलवे की टीम बिना पूर्व सूचना या नोटिस के सर्वे करने पहुंच गई। किसानों को यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि टीम किस विभाग की है और किस आदेश के तहत सर्वे किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान प्रशासन का विरोध नहीं करना चाहते, लेकिन अपनी जमीन और संपत्ति के बारे में जानकारी पाने का अधिकार रखते हैं। पहले यह बताया जाए कि किस किसान की कितनी जमीन ली जाएगी और मुआवजे की गणना किस दर से होगी। इसके बाद किसान खुद अपनी जमीन दिखाने के लिए तैयार हैं।

पांच गांवों के 85 सर्वे नंबरों पर असर

प्रस्तावित रेल लाइन के लिए दाउदखेड़ी, चिंतामन, मोहनपुरा, मंगरोला और उज्जैन कस्बा क्षेत्र के 85 सर्वे नंबरों की जमीन चिह्नित की जा रही है। किसानों का कहना है कि बार-बार अलाइनमेंट बदलने से प्रभावित परिवार असमंजस में हैं। उन्हें अब तक यह जानकारी नहीं मिली है कि किसकी कितनी जमीन अधिग्रहित होगी। किसानों ने मांग की है कि सभी प्रभावित किसानों को एक साथ बैठाकर रेलवे और प्रशासन पूरी परियोजना का नक्शा और जमीन अधिग्रहण का विवरण उपलब्ध कराएं। कोर्ट में आपत्ति के बावजूद सर्वे पर सवालकिसानों ने रेल लाइन के अलाइनमेंट को लेकर कोर्ट में भी आपत्ति दर्ज कराई है।

उनका कहना है कि रेलवे अधिकारियों ने कोर्ट में जवाब पेश करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा है। इसके बावजूद शुक्रवार को जमीन पर सर्वे की कार्रवाई शुरू कर दी गई। किसानों ने इस पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब अलाइनमेंट को लेकर आपत्तियां लंबित हैं, तो पहले स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

सात कॉलोनियां व होटल भी बने; जमीन की कीमत पर विवाद

किसानों के मुताबिक प्रस्तावित रेल लाइन के आसपास सात कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं। क्षेत्र में बड़े होटल भी बन गए हैं और प्लॉट की कीमत करीब चार हजार रुपये प्रति वर्गफीट तक पहुंच गई है। किसानों का दावा है कि इस हिसाब से जमीन का बाजार मूल्य तीन से चार करोड़ रुपये प्रति बीघा है। इसके मुकाबले 15 लाख रुपये प्रति बीघा की गाइडलाइन पर चार गुना मुआवजे की गणना करने से करीब 60 लाख रुपये ही मिलेंगे।

किसानों का कहना है कि मुआवजे से जुड़ी यह जानकारी भी उन्हें लिखित में नहीं दी गई है। वे चाहते हैं कि सभी 85 प्रभावित किसानों के साथ बैठक कर जमीन की दर, अधिग्रहण का क्षेत्रफल और मुआवजे की गणना का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए।

ट्यूबवेल और पेड़ों का मूल्यांकन करने पहुंची थी टीम

नायब तहसीलदार दीप्ति मांझी ने बताया कि राजस्व और रेलवे की टीम खेतों में मौजूद ट्यूबवेल, पेड़ों सहित अन्य परिसंपत्तियों का मूल्यांकन करने पहुंची थी। इसके लिए किसानों से अनुमति मांगी जा रही थी, लेकिन किसान पहले मुआवजे और जमीन अधिग्रहण से जुड़ी जानकारी चाहते थे। उन्होंने बताया कि किसानों को दिवाली के बाद कार्यालय बुलाकर पूरी जानकारी देने की बात कही गई थी। क्षेत्र की सामान्य गाइडलाइन और मेन रोड की गाइडलाइन में अंतर होने के कारण भी मुआवजे को लेकर किसानों में असंतोष है।

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बायपास से उज्जैन स्टेशन पर 30 प्रतिशत कम होगा ट्रेनों का दबाव

सिंहस्थ-2028 में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने के मद्देनजर रेलवे चिंतामन से नईखेड़ी तक 8.60 किलोमीटर लंबी बायपास रेल लाइन बनाने की योजना पर काम कर रहा है। परियोजना की लागत 189.04 करोड़ रुपये प्रस्तावित है। इसके बनने से इंदौर से नागदा की ओर जाने वाली ट्रेनों को उज्जैन स्टेशन लाए बिना सीधे निकाला जा सकेगा। इससे ट्रेनों का इंजन बदलने और रिवर्सल में लगने वाला समय बचेगा।

रेलवे का अनुमान है कि बायपास बनने से उज्जैन स्टेशन पर ट्रेनों का दबाव करीब 30 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। सिंहस्थ में बढ़ने वाली रेल यातायात की जरूरतों को देखते हुए यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन जमीन अधिग्रहण, अलाइनमेंट और मुआवजे को लेकर किसानों की आपत्तियों ने इसके क्रियान्वयन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

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