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इंदौर के बाद अब उज्जैन भी बनाएगा कचरे को कंचन, नारियल के छिलके और पुराने जूते-चप्पल से बनेंगे उपयोगी उत्पाद

शहर में नारियल के छिलके और पुराने जूते-चप्पल भी अब कचरा प्रबंधन की नई व्यवस्था का हिस्सा बनने जा रहे हैं। नगर निगम इनकी रिसाइकिलिंग के लिए अलग-अलग प्ल...और पढ़ें

By Dheeraj GomeEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Wed, 14 Oct 2026 12:02:35 PM (IST)Updated Date: Wed, 14 Oct 2026 12:02:35 PM (IST)
इंदौर के बाद अब उज्जैन भी बनाएगा कचरे को कंचन, नारियल के छिलके और पुराने जूते-चप्पल से बनेंगे उपयोगी उत्पाद
महापौर परिषद की बैठक में शामिल महापौर, नगर निगम आयुक्त एवं एमआईसी सदस्य। -नईदुनिया

HighLights

  1. तीन तरह के वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की पहल
  2. कचरे से कमाई की तैयारी, एमआईसी ने प्रस्ताव किए स्वीकृत
  3. कचरे से उपयोगी संसाधन तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : शहर में नारियल के छिलके और पुराने जूते-चप्पल भी अब कचरा प्रबंधन की नई व्यवस्था का हिस्सा बनने जा रहे हैं। नगर निगम इनकी रिसाइकिलिंग के लिए अलग-अलग प्लांट स्थापित करने की तैयारी कर रहा है।

इसके साथ ही घट्टिया तहसील के ग्राम डबरी में जैविक कचरे से कंप्रेस्ड बायोगैस बनाने और रिसाइक्लिंग योग्य सामग्री अलग करने के लिए सीबीजी सह एमआरएफ प्लांट प्रस्तावित है। यानी कचरे को केवल उठाकर निपटाने के बजाय उससे उपयोगी संसाधन तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।


तीनों परियोजनाओं के प्रस्तावों पर अनुशंसा की

मंगलवार को महापौर मुकेश टटवाल की अध्यक्षता में हुई मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) की बैठक में तीनों परियोजनाओं के प्रस्तावों पर अनुशंसा की। नगर निगम की योजना नारियल के कचरे और फुटवियर वेस्ट के पुनर्चक्रण के लिए अलग-अलग प्लांट स्थापित करने की है।

नारियल के छिलकों और रेशों को प्रसंस्कृत कर उपयोगी उत्पाद बनाए जा सकते हैं

नारियल के छिलकों और रेशों को प्रसंस्कृत कर उपयोगी उत्पाद बनाए जा सकते हैं। इसी तरह पुराने जूते-चप्पलों के विभिन्न हिस्सों को उनकी सामग्री के अनुसार अलग कर पुनर्चक्रण के लिए भेजा जा सकता है। इन प्लांटों के लिए एजेंसी चयन की खातिर ई-निविदा आमंत्रित करने के प्रस्ताव पर अनुशंसा की गई है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों प्लांटों की क्षमता कितनी होगी, उनमें कितनी मात्रा में कचरे का प्रसंस्करण होगा और तैयार उत्पाद क्या होंगे। इनका विवरण एजेंसी चयन और परियोजना की शर्तें तय होने के बाद सामने आएगा।

डबरी में कचरे से बनेगी कंप्रेस्ड बायोगैस

तीसरी परियोजना डबरी गांव में सीबीजी सह मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) प्लांट की है। इसे स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर स्थापित करने की योजना है। सीबीजी प्लांट में उपयुक्त जैविक कचरे से कंप्रेस्ड बायोगैस तैयार की जा सकती है।

वहीं, एमआरएफ केंद्र पर कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में छांटकर पुनर्चक्रण योग्य सामग्री निकाली जाती है। इस तरह की व्यवस्था में कचरे का पृथक्करण सबसे महत्वपूर्ण होगा। यदि गीला, सूखा और पुनर्चक्रण योग्य कचरा सही तरीके से अलग नहीं होता है, तो प्लांटों की उपयोगिता प्रभावित हो सकती है। नियमित कचरा आपूर्ति, संचालन की जिम्मेदारी और तैयार उत्पादों के उपयोग की व्यवस्था भी परियोजनाओं के परिणाम तय करेगी।

ये प्रस्ताव भी पारित

बैठक में सड़क चौड़ीकरण और निर्माण से प्रभावित 25 मुआवजा प्रकरणों में 2 करोड़ 47 लाख रुपये की अनुशंसा की गई। एन-कैप मद से दो सीएनजी रोड स्वीपिंग वाहन खरीदने तथा तीन वर्ष तक संचालन-संधारण के लिए एजेंसी चयन के प्रस्ताव पर भी अनुशंसा की गई। प्रमोद मालवीय की कार्यपालन यंत्री पद पर संविदा नियुक्ति संबंधी पूर्व स्वीकृति की पुष्टि का प्रस्ताव भी रखा गया।

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