
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : घर का प्लास्टिक, बोतलें और दूसरा सूखा कचरा अब सड़क या कूड़ेदान में फेंकने के बजाय नाश्ता या जरूरत का सामान पाने का जरिया बन सकता है। उज्जैन नगर निगम शहर में तीन जगह ‘कचरा कैफे’ खोलने जा रहा है। यहां नागरिक पुनर्चक्रण योग्य कचरा जमा करेंगे और बदले में खाद्य पदार्थ, दैनिक उपयोग की सामग्री या स्व-सहायता समूहों के बनाए उत्पाद ले सकेंगे।
योजना के लिए फ्रीगंज में पाकीजा शोरूम के पास, नानाखेड़ा बस स्टैंड और चारधाम मंदिर पार्किंग में स्थान प्रस्तावित किए गए हैं। निगम ने इनके संचालन के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की है। यानी फिलहाल कैफे खुलने की तैयारी है, संचालन शुरू होने का दावा अभी नहीं किया जा सकता।
योजना की खास बात यह है कि नगर निगम संचालनकर्ता एजेंसी को भुगतान नहीं करेगा। इसके बजाय सबसे अधिक रॉयल्टी देने का प्रस्ताव रखने वाली एजेंसी को पांच साल के लिए संचालन का अधिकार दिया जाएगा। आपसी सहमति से अवधि तीन साल और बढ़ाई जा सकेगी।
एजेंसी को अनुबंध के तीन दिन के भीतर तीन महीने की अग्रिम रायल्टी जमा करनी होगी, जबकि आगे हर महीने की एक से पांच तारीख के बीच भुगतान करना होगा। कैफे पर केवल कचरा जमा नहीं होगा। कपड़े के थैले, डस्टबिन, जैविक खाद, कबाड़ से बनी कलाकृतियां और घरेलू कंपोस्टिंग के उपकरण भी बिक्री के लिए रखे जाएंगे। संचालन और उत्पाद बिक्री में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को प्राथमिकता देने का प्रावधान है। इससे कचरा प्रबंधन के साथ स्थानीय महिलाओं के उत्पादों को बाजार मिलने की संभावना भी है।
योजना अनुसार नानाखेड़ा बस स्टैंड पर 500 वर्गफीट और चारधाम मंदिर पार्किंग में 150 वर्गफीट क्षेत्र का उल्लेख है। फ्रीगंज में पाकीजा शोरूम के पास भी केंद्र प्रस्तावित है। सफल एजेंसी को 50 हजार रुपये की परफॉर्मेंस सिक्युरिटी जमा करनी होगी।
बिजली-पानी के कनेक्शन निगम देगा, लेकिन बिल एजेंसी को भरने होंगे। कैफे की सफाई, सुरक्षा और सीसीटीवी की जिम्मेदारी भी संचालनकर्ता की होगी। निगम के सामने चुनौती अब निविदा पूरी करने के साथ इन केंद्रों को वास्तव में शुरू करने की है। यदि व्यवस्था नियमित और सुविधाजनक रही, तो शहर में खुले में कचरा फेंकने की प्रवृत्ति कम करने और कचरे को संसाधन में बदलने का नया रास्ता खुल सकता है।