
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : सिंहस्थ में अब किसानों के खेत भी श्रद्धालुओं के ठिकाने बन सकते हैं। किसानों की जमीन पर टेंट सिटी विकसित करने की संभावना पर शनिवार को संभागायुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर रोशन कुमार सिंह की मौजूदगी में चर्चा हुई।
यह पहल मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के उस निर्देश के बाद सामने आई है, जिसमें उन्होंने घट्टिया, तराना और आसपास के क्षेत्रों में टेंट सिटी तथा होल्डिंग एरिया विकसित करने की संभावनाएं तलाशने और किसानों-सामाजिक संस्थाओं को प्रोत्साहित करने को कहा था।
योजना आकार लेती है तो सिंहस्थ में श्रद्धालुओं के ठहरने के अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध हो सकेंगे। साथ ही किसानों को अपनी जमीन के उपयोग से आर्थिक अवसर और स्थानीय लोगों को सेवाओं के जरिए रोजगार मिल सकता है। हालांकि, टेंट सिटी के लिए जमीन, संख्या, क्षमता और संचालन की व्यवस्था अभी तय होना बाकी है।
सिंहस्थ मेला कार्यालय में आयोजित बैठक में पर्यटन विभाग के सहयोग से टैंट सिटी विकसित करने की अवधारणा पर विचार-विमर्श किया गया। प्रशासन ने किसानों को संभावित व्यवस्थाओं और उनसे मिलने वाले अवसरों की जानकारी दी।
किसानों से जमीन के उपयोग, जरूरी सुविधाओं, संचालन और उनकी अपेक्षाओं पर सुझाव मांगे गए। किसानों ने पहल में रुचि दिखाई और सहभागिता के प्रति सकारात्मक रुख रखा। अब किसानों की जरूरतों और सुझावों को ध्यान में रखकर संबंधित विभागों के समन्वय से आगे की कार्ययोजना तैयार करने पर चर्चा हुई है।
सिंहस्थ में देशभर से श्रद्धालु पहुंचेंगे। ऐसे में ठहरने के लिए पर्याप्त स्थान, सुविधाएं और अलग-अलग बजट के विकल्प उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा। शहर के बाहर या आसपास के क्षेत्रों में टेंट सिटी विकसित होने से आवास व्यवस्था का दायरा बढ़ सकता है। लेकिन इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि स्थल कहां चुने जाते हैं, कितने श्रद्धालुओं के ठहरने की क्षमता बनाई जाती है और वहां से प्रमुख स्नान स्थलों तक पहुंचने के लिए परिवहन की क्या व्यवस्था रहती है। किराये, बुकिंग और सुविधाओं का स्वरूप भी अभी निर्धारित नहीं हुआ है।
टेंट सिटी में भूमि उपयोग की शर्तें स्पष्ट होने पर किसानों को आर्थिक लाभ का अवसर मिल सकता है। भोजन, सफाई, परिवहन, सुरक्षा और अन्य सेवाओं में स्थानीय लोगों को काम मिल सकता है। इसके लिए भूमि उपयोग की अवधि, किसानों को मिलने वाला प्रतिफल, भुगतान की शर्तें और संचालन की जिम्मेदारी पारदर्शी रखना जरूरी होगा।
श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे, तभी यह व्यवस्था प्रभावी साबित हो सकेगी। बैठक में अपर मेला अधिकारी ओमप्रकाश सनोडिया, एमपीआइडीसी के निदेशक राजेश राठौर, एएसपी मनोज खत्री, पर्यटन विकास निगम के अधिकारी और क्षेत्रीय किसान उपस्थित रहे।