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होली 2026 : धुलेंडी पर जमकर उड़ाएं मस्ती का गुलाल, प्रथम प्रहर में ग्रहण का सूतक मान्य नहीं

ग्रस्त उदित चंद्र ग्रहण के नियम भी अलग हैं, विशेष कर जब उसकी अवधि एक घटी (24 मिनट) से भी कम हो, तो किसी प्रकार का दोष मान्य नहीं है।

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Fri, 27 Feb 2026 11:58:11 AM (IST)Updated Date: Fri, 27 Feb 2026 12:11:34 PM (IST)
होली 2026 : धुलेंडी पर जमकर उड़ाएं मस्ती का गुलाल, प्रथम प्रहर में ग्रहण का सूतक मान्य नहीं
उज्जैन में बाबा महाकाल के मंदिर में सबसे पहले मनेगा रंगों का उत्सव।

HighLights

  1. उज्जैन में धुलेंडी के दिन निकलने वाली गेरों में कोई बंधन नहीं है
  2. परंपरागत गेर यथा समय पर निकाली जा सकेगी
  3. सूखें रंगों का प्रयोग करने में कोई दोष नहीं माना जाता है

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। होली पर चंद्र ग्रहण तथा उसके प्रभाव को लेकर जनमानस आशंकित हैं। लोगों को समझ नहीं आ रहा है कि ग्रहण के वेधकाल में धुलेंडी का पर्व मनाएं या नहीं। लेकिन धर्मशास्त्र के जानकारों का मत है कि ग्रस्त उदित चंद्र गहण का उतना प्रभाव नहीं रहता है। इसके सूतक काल के प्रथम चरण में दोष मान्य नहीं है। ऐसे में सुबह से से दोपहर तक जमकर होली खेलें।

महाकाल मंदिर में सुबह 4 से 6 बजे तक भस्म आरती में रंगोत्सव मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला ने बताया भविष्य पुराण, यम स्मृति, हिमाद्री सहित स्मृति ग्रंथों एवं शास्त्रों सहित ग्रहण के संबंध में अलग-अलग मत प्रकट किए गए हैं।


ग्रस्त उदित चंद्र ग्रहण के नियम भी अलग हैं, विशेष कर जब उसकी अवधि एक घटी (24 मिनट) से भी कम हो, तो किसी प्रकार का दोष मान्य नहीं है। 3 मार्च को उज्जैन में ग्रस्त उदित चंद्रमा केवल 17 मिनट दिखाई देगा, ऐसे में इस ग्रहण की कोई मान्यता नहीं है।

लेकिन फिर भी ग्रहण दिखाई देने वाले मत को मान्य भी करें तो इसके सूतक काल के प्रथम प्रहर में होली जैसा पारंपरिक त्योहार मनाने में कोई भी दोष नहीं है। वैसे भी धुलेंडी अबीर, गुलाल से खेली जाती है। सूखें रंगों का प्रयोग करने में किसी भी प्रकार का कोई दोष नहीं लगता है।

सूतक काल में निकलेगी परंपरागत गैर

धुलेंडी पर परंपरागत गैर निकलाने की मान्यता है। शास्त्रीय अभिमत में ग्रहण के सूतक के अंतर्गत सामान्यतः नियमन की बात कही जाती है। किंतु यह बात भी सामने आती है कि यदि ग्रहण का सूतक चार याम का हो तो प्रथम याम में परंपरागत कर्म या क्रियात्मकता का कोई दोष नहीं माना जाता है।

इस संबंध में अलग-अलग पुराणों में सांकेतिक प्रभाग दिया गया है। इस दृष्टि से उज्जैन में धुलेंडी के दिन निकलने वाली गेरों में कोई बंधन नहीं है। अर्थात परंपरागत गेर यथा समय पर निकाली जा सकेगी।

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