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उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे ग्रीन बेल्ट में बना लिया होटल और कॉटेज

उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे ग्रीन बेल्ट में पक्के निर्माण का मामला सामने आया है। ग्राम गोठड़ा के सर्वे नंबर 31 और 32 में होटल राजवासा बनाया गया है...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Fri, 14 Aug 2026 10:43:34 AM (IST)Updated Date: Fri, 14 Aug 2026 10:49:36 AM (IST)
उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे ग्रीन बेल्ट में बना लिया होटल और कॉटेज
मास्टर प्लान में सर्वे नंबर 31 व 32 ग्रीन बेल्ट में दिखाया गया है। दूसरी तस्वीर सर्वे नंबर 31 व 32 पर बनाया गया होटल राजवासा।

HighLights

  1. बिना भौतिक सत्यापन किए अनुमति जारी करने का आरोप
  2. अधिकारियों की अनदेखी के चलते शिप्रा संरक्षण को लेकर उठ रहे सवाल
  3. एमआर-22 सड़क का रूट बदलने की तैयारी की जा रही

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। शिप्रा नदी के किनारे ग्रीन बेल्ट में होटल और कॉटेज निर्माण का मामला सामने आया है। नदी के निर्धारित 200 मीटर दायरे में बहुमंजिला होटल के साथ काटेज और अन्य पक्के निर्माण किए गए हैं। ग्राम गोठड़ा के सर्वे नंबर 31 और 32 में हुए इन निर्माणों को लेकर अब शिप्रा के ग्रीन बेल्ट के संरक्षण पर सवाल उठ रहे हैं।

पर्यावरण संरक्षकों ने शिकायत में आरोप लगाया कि अधिकारियों ने बिना भौतिक सत्यापन किए अनुमति जारी कर दी। वहीं, निर्माण के दौरान व बाद में भी जांच नहीं की गई। खास बात यह है कि इन्हीं निर्माणों को प्रभावित होने से बचाने के लिए प्रस्तावित एमआर-22 सड़क का रूट बदलने की तैयारी की जा रही है।


गोठड़ा के सर्वे नंबर 31 और 32 में होटल राजवासा बनाया गया है। बहुमंजिला होटल में गार्डन, स्विमिंग पूल और कॉटेज बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। होटल परिसर से नदी के घाट तक पहुंचने की व्यवस्था भी है। जहां पर होटल निर्माण किया गया है वह भूमि ग्रीन बेल्ट में है। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो रहा है कि ग्रीन बेल्ट में निर्माण की अनुमति किस आधार पर मिली और निर्माण के दौरान निर्धारित प्रतिबंधों का पालन हुआ या नहीं।

पीछे की ओर का क्षेत्र ग्रीन बेल्ट में आने तथा स्विमिंग पूल के ग्रीन बेल्ट दायरे में होने को लेकर स्थिति जांच का विषय है। मामले में ग्राम एवं नगर निवेश उज्जैन के अन्वेषक अंशुल गुप्ता का कहना कि कृषि भूमि पर ही अनुमति जारी की गई है। ग्रीन बेल्ट के लिए किसी प्रकार की अनुमति विभाग से प्रदान नहीं की गई है। होटल संचालक प्रदीप अग्रवाल ने दावा किया है कि होटल ग्रीन बेल्ट के बाहर है और निर्माण नगर एवं ग्राम निवेश विभाग के स्वीकृत नक्शे के अनुसार किया गया है।

पक्के निर्माण बचाने एमआर-22 का रूट बदलने की तैयारी

मास्टर प्लान-2035 में शिप्रा नदी के घाट से 200 मीटर की दूरी पर 30 मीटर चौड़ी एमआर-22 सड़क प्रस्तावित है। जमीन चिन्हित होने के बाद सामने आया कि इस क्षेत्र में पहले से कई पक्के निर्माण मौजूद हैं। मूल प्रस्तावित रूट पर सड़क बनने से इन निर्माणों पर असर पड़ सकता है। इसके चलते अब सड़क को नदी से करीब 100 मीटर दूर करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

शिप्रा के संरक्षण के लिए निर्धारित ग्रीन बेल्ट में निर्माण होने के बाद यदि सड़क परियोजना को ही इन निर्माणों के अनुरूप बदला जाता है तो इससे भविष्य में नदी किनारे निर्माण को लेकर गलत संदेश जाने की आशंका है। एमआर-22 का रूट बदलने से पहले ग्रीन बेल्ट में हुए निर्माणों की वैधता, स्वीकृतियां और निर्धारित नियमों के पालन की जांच करना जरूरी माना जा रहा है।

हाईकोर्ट ने भी ग्रीन बेल्ट के निर्माणों की सूची मांगी

शिप्रा नदी के ग्रीन बेल्ट में हुए निर्माणों का मामला न्यायालय तक पहुंच चुका है। हाईकोर्ट ने ग्रीन बेल्ट में हुए निर्माणों की सूची मांगी थी। इसके बाद नदी के 200 मीटर क्षेत्र में मौजूद निर्माणों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी जांच-पड़ताल महत्वपूर्ण हो गई है।

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फाइल देखकर बता सकूंगा

अभी बैठक में शामिल होने बाहर आया हूं। कार्यालय में फाइल देखकर ही कुछ बता सकता हूं।- विष्णु खरे, संयुक्त निदेशक, टीएनसीपी, उज्जैन