
धीरज गोमे, नईदुनिया, उज्जैन। महाकाल की नगरी में गुरुवार को सेवाज्ञ संस्थानम् की तीन दिवसीय युवा धर्म संसद की शुरुआत हुई। प्रारंभिक सत्र ‘युवा पंचायत’ में मतांतरण और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े विषयों पर वक्ताओं ने विचार रखे।
रांची (झारखंड) में पदस्थ भारतीय राजस्व सेवा की अधिकारी निशा उरांव ने मतांतरण के दंश को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि अपनी मूल मिट्टी से उखाड़कर गमले में लगाया गया पौधा जिंदा तो रहता है और उसमें फूल भी आते, लेकिन उसकी गहरी जड़ों का स्थायित्व और विशाल छाया देने की ताकत चली जाती है।
मतांतरण के प्रभाव को इस रूपक के माध्यम से समझाते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जब कोई समाज अपनी मूल परंपरा, सामाजिक स्मृति और सांस्कृतिक चेतना से कटता है, तो उसकी जड़ें कमजोर हो जाती हैं और समाज में एक शून्यता पैदा होती है।
इसी शून्यता का फायदा उठाकर भ्रामक नैरेटिव प्रवेश करते हैं। उन्होंने आदिवासी समाज को सनातन परंपरा से अलग बताने या दोनों के बीच दूरी पैदा करने की कोशिशों पर भी कड़ा ऐतराज जताया। कहा कि आदिवासी और सनातन धर्म, दोनों ही प्रकृति के पूजक हैं।
प्रकृति के प्रति अपार सम्मान और उसकी रक्षा करना भारतीय संस्कृति का मूल आधार रहा है। ऐसे में आदिवासियों को सनातन से अलग करके देखने का प्रयास पूरी तरह निराधार है। भगवान श्रीराम का उदाहरण देते हुए उन्होंने याद दिलाया कि रावण पर विजय यात्रा में वनवासी समाज की केंद्रीय और ऐतिहासिक भूमिका रही है।
उन्होंने सनातनी विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि ईश्वर तक पहुंचने के रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन अंतिम सत्य एक ही है। केवल अपने रास्ते को सही और दूसरे के मार्ग को गलत मानना समाज में अविश्वास और विभाजन पैदा करता है।
इससे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत गुरुवार को इंदौर होते हुए उज्जैन पहुंचे। वे शुक्रवार को युवा धर्म संसद का विधिवत उद्घाटन करेंगे। अपने उज्जैन प्रवास के पहले दिन गुरुवार को उन्होंने स्वयंसेवकों को संबोधित किया। करीब एक घंटे चले कार्यक्रम में संघ प्रमुख ने आरएसएस की अब तक की यात्रा, वर्तमान की उपलब्धियां और आगे की भूमिका पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि पहले संघ को लेकर कुछ लोगों की अलग विचारधारा थी। हम पर प्रतिबंध भी लगे, किंतु अब हमारी स्वीकार्यता व्यापक है। हमने 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं। अब आगे हमारी भूमिका और बढ़ गई है। पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, समरसता, नागरिक अनुशासन जैसे विषयों पर काम करने की बात भी संघ प्रमुख ने दोहराई।
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