
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के साथ कथित अभद्रता के मामले ने तूल पकड़ लिया है। परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डा. रविंद्रपुरी महाराज ने मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक को पद से हटाने की मांग की है। रविंद्रपुरी महाराज ने इस संबंध में मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव को पत्र भी लिखा है।
पत्र में कहा गया है कि सिंहस्थ महापर्व 2028 को देखते हुए देशभर के विभिन्न अखाड़ों से जुड़े साधु-संतों का उज्जैन आगमन और प्रवास लगातार हो रहा है। ऐसे में प्रत्येक साधु-संत की स्वाभाविक इच्छा भगवान महाकाल के दर्शन-पूजन की रहती है, लेकिन मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक के अधीनस्थ कर्मचारियों के माध्यम से साधु-संतों के साथ अपमानजनक व्यवहार कराया जा रहा है। परिषद अध्यक्ष ने पत्र में अपने साथ हुई घटना का भी उल्लेख किया है।
उन्होंने बताया कि 5 नवंबर को वे स्वयं भगवान महाकाल के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे थे। प्रोटोकाल के अनुसार जिस सहायक प्रशासक की ड्यूटी लगाई गई थी, वह निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद मंदिर कर्मचारियों ने प्रशासक के सख्त आदेश का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी साधु-संत बिना चेकिंग के दर्शन नहीं करेगा। उनके साथ भी अनावश्यक रोक-टोक की गई और दर्शन व्यवस्था में व्यवधान उत्पन्न किया गया।
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रविंद्रपुरी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वर्तमान प्रशासक को तत्काल प्रभाव से पद से हटाया जाए तथा उनके स्थान पर अनुभवी, संवेदनशील और धार्मिक परंपराओं की समझ रखने वाले योग्य अधिकारी की नियुक्ति की जाए, ताकि साधु-संतों और श्रद्धालुओं को सम्मानपूर्वक दर्शन की व्यवस्था मिल सके।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी को महाकाल मंदिर की प्रोटोकाल दर्शन व्यवस्था के अनुसार सम्मान पूर्वक दर्शन कराए गए हैं। -प्रथम कौशिक, प्रशासक, श्री महाकालेश्वर मंदिर।