
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को उज्जैन की सड़कों पर पैदल चल सिंहस्थ-2028 के विकास कार्यों की तैयारी परखी। पहले वे इंदौर रोड पर शासकीय उज्जैन इंजीनियरिंग कालेज के सामने बन रहे आईटी पार्क को देखने पहुंचे, इसके बाद सड़क परियोजनाओं का जायजा लिया। प्रभावित रहवासियों के बीच पहुंचे तो उनसे सीधे पूछा- निर्माण से कोई परेशानी तो नहीं है? लोगों ने सड़क और आवागमन से जुड़ी छुटपुट समस्याएं बताईं। मुख्यमंत्री ने उनकी बात सुनी और अधिकारियों से मौके की स्थिति समझी।
अफसरों से कहा कि महाकुंभ सिंहस्थ में करोड़ों श्रद्धालु आएंगे, इसलिए शहर को अभी से तैयार करें। केवल मेला क्षेत्र की व्यवस्था पर्याप्त नहीं होगी। श्रद्धालुओं का दबाव पूरे शहर पर आएगा, इसलिए प्रमुख सड़कों की क्षमता बढ़ाने के साथ यातायात और दूसरी आधारभूत सुविधाएं भी समय रहते तैयार करनी होंगी।
यह भी कहा कि पहले उज्जैन में सालभर में करीब 60 से 70 लाख श्रद्धालु आते थे। पिछले वर्ष करीब आठ करोड़ श्रद्धालु आए और इस वर्ष यह संख्या 12 करोड़ से अधिक होने की दिशा में है। उन्होंने सिंहस्थ की दृष्टि से महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को गति देने और तय समय-सीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए।
नीलगंगा चौराहे से गैल इंडिया चौराहे की ओर बढ़ते हुए मुख्यमंत्री कई जगह रुके। सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित रहवासियों से उनकी समस्याएं पूछीं। लोगों ने निर्माण के दौरान रास्ते, आवागमन और अन्य छोटी-छोटी दिक्कतें बताईं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि नागरिकों की समस्याओं का समाधान करते हुए काम आगे बढ़ाया जाए। सिंधी कालोनी चौराहे से नानाखेड़ा बस स्टैंड तक के मार्ग को मुख्यमंत्री ने महाकाल मंदिर जाने वाले प्रमुख रास्तों में से एक बताया।
उन्होंने कहा कि नानाखेड़ा की ओर आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्ग भी रहेगा। पुराने और नए शहर को एलिवेटेड ब्रिज के माध्यम से जोड़ने की दृष्टि से यह मार्ग महत्वपूर्ण है। चौड़ीकरण के लिए कई रहवासियों ने अपने मकान, दुकान और जमीन का हिस्सा पीछे कर सहयोग किया है।
मुख्यमंत्री ने नागरिकों का आभार जताया। कई जगह रहवासियों ने पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री बच्चों से भी मिले और उनसे हाथ मिलाकर उनका उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों से प्रभावित होने के बावजूद नागरिक जिस तरह सहयोग कर रहे हैं, वह उज्जैन की सकारात्मक सोच को दिखाता है।
सिंहस्थ की तैयारी में सड़क के साथ पानी, सीवरेज, बिजली, घाट और यातायात की स्थायी अधोसंरचना पर भी काम चल रहा है। महाविकास योजना में करीब 304 किमी नई सड़कों के लिए 8719 करोड़ रुपये और करीब 276 किमी सड़कों के चौड़ीकरण के लिए 4815 करोड़ रुपये का प्राविधान है।
19 पुलों के निर्माण पर करीब 440 करोड़ रुपये खर्च किए जाने जाने को काम प्रचलित हैं। हरियाखेड़ी परियोजना में जलशोधन क्षमता 151 से बढ़ाकर 400 एमएलडी करने की योजना है। सीवरेज व्यवस्था मजबूत करने और घाटों के विकास सहित अन्य स्थायी सुविधाओं पर भी काम किया जा रहा है।
सड़क निरीक्षण से पहले मुख्यमंत्री निर्माणाधीन आईटी पार्क पहुंचे। करीब 2.16 हेक्टेयर में विकसित हो रहे आईटी पार्क में 15480 वर्गमीटर बिल्ट-अप एरिया प्रस्तावित है। इसमें 11,436 वर्गमीटर क्षेत्र आईटी कंपनियों के लिए आरक्षित रहेगा।
मुख्यमंत्री ने निर्माण की प्रगति देखी और अधिकारियों से समय-सीमा की जानकारी लेकर गुणवत्ता के साथ काम पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आज का दौर इनोवेशन और टेक्नोलॉजी का है। उज्जैन-इंदौर मेट्रोपालिटन सिटी के विकास के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नई तकनीक, कौशल विकास और नवाचार के जरिए युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार किए जा रहे हैं।
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मुख्यमंत्री को निर्माणाधीन यूनिटी माल, हरिफाटक से महाकाल लोक तक बन रहे अंडरपास और हरिफाटक पुल चौड़ीकरण परियोजना का निरीक्षण भी करना था। हालांकि ऐन वक्त पर इन तीनों स्थानों का दौरा निरस्त कर दिया गया।
निरीक्षण के दौरान राज्यसभा सदस्य बालयोगी उमेशनाथ महाराज, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, सिंहस्थ प्राधिकरण अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, संभागायुक्त आशीष सिंह, एडीजी राकेश गुप्ता, डीआईजी नवनीत भसीन, कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा और नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा सहित अन्य अधिकारी साथ थे।