Mahakal Sawan Sawari 2024: सावन मास में आखिरी सवारी, महाकाल के 5 रूप में दर्शन पाकर भक्त हुए निहाल
उज्जैन में सावन मास के सोमवार को महाकाल की अंतिम सवारी निकली, जिसमें मुख्यमंत्री और भाजपा अध्यक्ष शामिल हुए। भगवान महाकाल के 5 रूपों के दर्शन हुए। सवा ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 19 Aug 2024 06:49:07 PM (IST)Updated Date: Mon, 19 Aug 2024 06:49:07 PM (IST)
भगवान चंद्रमौलेश्वर।HighLights
- सीएम ने पत्नी-बेटे संग पूजा कर पालकी रवाना की।
- सवारी 5 किलोमीटर और 5 घंटे में शिप्रा तट पहुंची।
- 26 अगस्त को भादौ मास की शाही सवारी निकलेगी।
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन । सावन मास में सोमवार को भगवान महाकाल की आखिरी सवारी निकली। मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार सीएम डॉ.मोहन यादव भी सवारी में शामिल हुए। उन्होंने सभा मंडपम में पत्नी व बेटे के साथ भगवान महाकाल के चंद्रमौलेश्वर रूप का पूजन कर पालकी को नगर भ्रमण के लिए रवाना किया। इसके बाद महाकाल मंदिर से शिप्रा तट तक सवारी में पैदल चले।
भाजपा अध्यक्ष व प्रभारी मंत्री भी शामिल
इस दौरान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा व प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल भी मौजूद थे। सवारी में सीआरपीएफ का पुलिस बैंड भी शामिल हुआ। गौंड जनजाति के कलाकार सैला करमा नृत्य की प्रस्तुति देते निकले। श्रावणी पूर्णिमा के महासंयोग में निकली भगवान महाकाल की सवारी में भक्तों को भगवान महाकाल के एक साथ पांच रूपों के दर्शन हुए।
अवंतिकानाथ चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरुड़ पर शिवतांडव, नंदी पर उमा महेश व रथ पर होल्कर रूप में सवार होकर भक्तों को दर्शन देने निकले। शाम 4 बजे महाकालेश्वर मंदिर से शुरू हुई सवारी परंपरागत मार्गों से होते हुए शाम करीब 5 बजे शिप्रा तट पहुंची।
यहां भगवान महाकाल का मोक्षदायिनी शिप्रा के जल से अभिषेक कर पूजा अर्चना की गई। पूजन पश्चात सवारी निर्धारित मार्गों से होते हुए शाम 7 बजे पुन: मंदिर पहुंची। अब 26 अगस्त को भादौ मास की पहली तथा 2 सितंबर को श्रावण-भादौ मास की शाही सवारी निकाली जाएगी।
सवारी में यह खास
- 5 किलो मीटर लंबा सवारी मार्ग
- 5 रूपों में हुए भगवान महाकाल के दर्शन
- 5 घंटे छाया रहा भक्ति का उल्लास
- 9 भजन व झांझ डमरू दल शामिल थे