
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में 6 से 15 फरवरी तक शिव नवरात्र के रूप में महाशिवरात्रि उत्सव मनाया जाएगा। भगवान महाकाल दूल्हा बनेंगे और नौ दिन नव रूपों में भक्तों का मन मोहेंगे। शिव नवरात्र में अभिषेक पूजन का विशेष अनुक्रम रहेगा, इसके चलते भगवान की आरती व पूजन का समय भी बदलेगा। मंदिर प्रशासन ने महापर्व को लेकर तैयारी शुरू कर दी है।
महाकाल देश का एक मात्र ज्योतिर्लिंग हैं जहां फाल्गुन कृष्ण पंचमी से त्रयोदशी तक शिवनवरात्र मनाई जाती है। वस्तुत: यह शिव पार्वती के विवाह का उत्सव है। मंदिर की पूजन परंपरा में इसे लोकपर्व के रूप में मनाया जाता है। इन नौ दिनों में भगवान महाकाल दूल्हा बनते हैं और उसी प्रकार से उनकी पूजा अर्चना का क्रम सुनिश्चित किया जाता है। नौ दिन भगवान का अलग-अलग स्वरूप में श्रृंगार होता है।
महाशिवरात्रि पर महानिषाकाल में महाकाल की महापूजा होती है और उनके शीश फल व फूलों से बना सेहरा सजाया जाता है। परंपरा अनुसार इस बार भी 6 फरवरी को सुबह 8 से 9 बजे तक कोटितीर्थ कुंड के समीप स्थित श्री कोटेश्वर महादेव मंदिर में पूजा अर्चना के साथ शिवनवरात्र की शुरुआत होगी। इसके बाद सुबह 9.30 बजे से गर्भृह में पूजा का का क्रम शुरू होगा।
पुजारी भगवान का पंचामृत अभिषेक पूजन कर भगवान को हल्दी,चंदन का उबटन लगाएंगे। इसके बाद 11 ब्राह्मणों द्वारा रुद्रपाठ किया जाएगा। दोपहर 1 बजे भोग आरती तथा दोपहर 3 बजे संध्या पूजन के बाद भगवान का विशेष श्रृंगार होगा। शाम 4 बजे से मंदिर परिसर स्थित मार्बल चबूतरे पर नारदीय संकीर्तन से हरिकथा की जाएगी। पूजा अर्चना का यह क्रम पूरे नौ दिन चलेगा।
महाकाल मंदिर में प्रतिदिन सुबह 10 बजे भोग आरती तथा शाम 5 बजे संध्या पूजा होती है। शिवनवरात्र में पूजन का विशेष क्रम होने से भोग आरती दोपहर 1 बजे तथा संध्या आरती शाम 5 की बजाय दोपहर 3 बजे होगी। इसके बाद भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाएगा।
महाशिवरात्रि को लेकर योजना बनाई जा रही है। जल्द ही इसे अमल में लाया जाएगा। भक्तों को सुविधा पूर्वक भगवान के दर्शन कराए जाएंगे। - प्रथम कौशिक, प्रशासक महाकालेश्वर मंदिर