
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार को दर्शन के दौरान अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी के साथ एक कर्मचारी द्वारा कथित अभद्रता का मामला सामने आया है। कर्मचारी के व्यवहार से नाराज महाराज ने मीडिया से चर्चा में मंदिर की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि मंदिर में कर्मचारी साधु-संतों के साथ अभद्रता करते हैं और उनका अपमान करते हैं। यह स्थिति उचित नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि मंदिर को सनातन विरोधी कर्मचारियों ने धंधा बना रखा है।
महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि साधु-संत सनातन धर्म और परंपराओं के संवाहक हैं। मंदिर में उनके साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। आने वाले सिंहस्थ महाकुंभ को देखते हुए यह स्थिति और भी चिंताजनक है।
सिंहस्थ में देशभर से साधु-संतों के अखाड़े और धर्माचार्य उज्जैन आएंगे। ऐसे में मंदिर में साधु-संतों का सम्मान और धार्मिक परंपराओं का निर्वहन सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने कहा कि साधु-संतों और मंदिर की व्यवस्था के बीच सम्मान एवं समन्वय होना चाहिए, न कि विवाद।
दर्शन के दौरान जिस कर्मचारी ने अभद्र व्यवहार किया, उसका नाम उन्होंने मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक को बता दिया है। महाराज ने बताया मामले की शिकायत भोपाल में उच्च स्तर पर की हैl
उन्होंने कहा कि यह केवल उनके साथ हुए व्यवहार का विषय नहीं है, बल्कि साधु-संतों के सम्मान और सनातन परंपरा से जुड़ा मामला है। यदि मंदिर में इस तरह की स्थितियां बनी रहीं तो इसे दिल्ली तक ले जाकर संबंधित स्तर पर चर्चा करेंगे।
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