
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : शरद की धवल चांदनी में रविवार को धर्मधानी उज्जैन आस्था के अमृत से सराबोर होगी। सोलह कलाओं से परिपूर्ण चंद्रमा की अमृतमयी किरणों के बीच हरिहर के आंगन में शरद उत्सव मनेगा। महाकाल के दरबार से श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम तक भक्ति का उल्लास छाएगा।
कहीं भगवान को केसरिया दूध का भोग लगेगा, तो कहीं खीर प्रसादी का वितरण होगा। पीर मत्स्येंद्रनाथ की समाधि पर चादर चढ़ेगी, वहीं मां गढ़कालिका के दरबार में विशेष पूजा-अर्चना होगी। शहर में कुछ स्थानों पर गरबा उत्सव का भी आयोजन होगा।
ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में रविवार को संध्या आरती के दौरान शरद उत्सव मनाया जाएगा। पुजारी भगवान महाकाल को केसरिया मीठे दूध का भोग लगाएंगे। मंदिर के नैवेद्य कक्ष में बालगोपाल को दूध का भोग लगाया जाएगा। 27 अक्टूबर को कार्तिक प्रतिपदा से भगवान महाकाल की पांच में से तीन आरती का समय बदलेगा।
भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम में शाम को भगवान बलराम,श्रीकृष्ण,सुदामा तथा गुरुश्रेष्ठ सांदीपनि मुनि को खीर का महाभोग लगाया जाएगा। भगवान को शरद पूर्णिमा के चंद्रमा की तरह सफेद पोशाक धारण कराई जाएगी।
गढ़कालिका क्षेत्र के समीप स्थित प्राचीन पीर मत्स्येंद्रनाथ की समाधि पर रविवार को शरद उत्सव मनाया जाएगा। महंत पीर रामनाथ महाराज के सान्निध्य में शाम को चादर चल समारोह निकलेगा। पीर मत्स्येंद्रनाथ की समाधि पर चादर चढ़ाई जाएगी। रात्रि में भर्तृहरि गुफा परिसर में भजन कीर्तन व खीर महाप्रसादी का आयोजन होगा।
श्री क्षेत्र वाल्मीकि धाम आश्रम में सोमवार को वाल्मीकि जयंती मनाई जाएगी। आश्रम पीठाधीश्वर राज्यसभा सदस्य संत उमेशनाथ महाराज के सान्निध्य में सुबह आश्रम परिसर स्थित श्री कमलेश्वर वाल्मीकेश्वर महादेव का पंचामृत अभिषेक पूजन व रुद्राभिषेक होगा। ब्रह्मलीन संत श्री सोहनदास महाराज की समाधि पर चादर चढ़ाई जाएगी। इसके बाद महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर माल्यार्पण व पूजन होगा। दिनभर भजन-कीर्तन तथा भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा पर 27 अक्टूबर को प्रतिदिन होने वाली पांच में से तीन आरतियों का समय बदलेगा। बालभोग व भोग आरती वर्तमान समय से आधा घंटा देरी से तथा शाम को संध्या आरती आधा घंटा जल्दी होगी। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से शुरू होने वाला आरती का यह क्रम फाल्गुन पूर्णिमा तक चलेगा।
पं. महेश पुजारी ने बताया ज्योतिर्लिंग की पूजन परंपरा में शरद पूर्णिमा से सर्दी की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन संध्या आरती में भगवान महाकाल को केसरिया मीठे दूध का भोग लगाया जाता है। इसके बाद अगले दिन कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से मंदिर में प्रतिदिन होने वाली पांच आरतियों में से तीन आरतियों का समय बदलता है।
प्रत्येक छह माह में सर्दी और गर्मी के हिसाब से तीन आरतियों के क्रम में बदलाव किया जाता है। जबकि तड़के 4 बजे होने वाली भस्म आरती, शाम 5 बजे होने वाली संध्या पूजा तथा रात 10.30 बजे होने वाली शयन आरती अपने निर्धारित समय पर होती हैं।
शरद पूर्णिमा से शुरू हुआ ऋतु परिवर्तन का क्रम धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए भगवान महाकाल की दिनचर्या में भी बदलाव लाता है। प्रतिपदा पर आरती का समय बदलने के साथ भगवान महाकाल भोग आरती में भोजन जल्दी करने लगते हैं। वहीं कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (रूप चौदस) से भगवान महाकाल को प्रतिदिन भस्म आरती में गर्म जल से स्नान कराने का क्रम शुरू हो जाता है, जो फाल्गुन पूर्णिमा अर्थात होली के दिन तक अनवरत जारी रहता है।
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