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उज्जैन के सेवाधाम में 17 बच्चों की मौत के मामले में मुख्य सचिव सहित अफसरों को नोटिस

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इसके साथ राज्य सरकार से प्रदेश में संचालित सभी चाइल्ड केयर होम और अनाथालयों की संख्या, उनकी वर्तमान स्थिति और हालिया निरीक्षण...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Fri, 27 Feb 2026 01:20:36 PM (IST)Updated Date: Fri, 27 Feb 2026 01:31:47 PM (IST)
उज्जैन के सेवाधाम में 17 बच्चों की मौत के मामले में मुख्य सचिव सहित अफसरों को नोटिस
उज्जैन का सेवाधाम आश्रम।

HighLights

  1. लगातार मौतों ने आश्रम की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं, मानिटरिंग और मेडिकल रिस्पांस पर गंभीर सवाल
  2. खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि आश्रम की निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बाद अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी
  3. हाईकोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय होने की संभावना बढ़ गई है

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। इंदौर से उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में भेजे गए 86 बच्चों में से 17 की मौत के मामले ने अब न्यायिक मोड़ ले लिया है। हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका (पीआईएल) के रूप में दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

अदालत ने मामले में मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव, उज्जैन जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी तथा सेवाधाम आश्रम के अधीक्षक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब तलब किया है।

खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि आश्रम की निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बाद अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी। कोर्ट ने राज्य सरकार से प्रदेश में संचालित सभी चाइल्ड केयर होम और अनाथालयों की संख्या, उनकी वर्तमान स्थिति और हालिया निरीक्षण रिपोर्ट भी मांगी है। वरिष्ठ अधिवक्ता को न्यायमित्र नियुक्त किया गया है ताकि मामले की निष्पक्ष निगरानी हो सके।


क्या है मामला

जून-जुलाई 2024 में इंदौर के युगपुरुष आश्रम में हैजे से हुई 10 बच्चों की मौत के बाद शासन ने वहां के 86 बच्चों को उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में शिफ्ट किया था। जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच इनमें से 17 की मौत हो गई। मृत्यु होने तक 7 बच्चे 18 वर्ष की उम्र पार कर वयस्क हो चुके थे। सरकारी रिकार्ड में अधिकांश की मौतों का कारण सांस लेने में तकलीफ दर्ज है।

लगातार मौतों ने आश्रम की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं, मानिटरिंग और मेडिकल रिस्पांस पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग ने पहले ही जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। विभाग यह जांच कर रहा है कि बच्चों को समय पर इलाज मिला या नहीं और क्या स्थानांतरण के दौरान स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पालन किया गया था।

एक बच्चे के लापता होने की घटना भी पुलिस जांच के दायरे में है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय होने की संभावना बढ़ गई है। अदालत ने संकेत दिए हैं कि यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और प्रबंधन पर कार्रवाई हो सकती है।

इन बच्चों की हुई मौत

कविशा (8), हिमानी (13), बबलू (7), संदेश (10), ध्वनि पारुल (12), पवन (16) और खुशी (17), कार्तिक (7), कुमकुम (18), स्वर्णा (12), छोटू उर्फ अटल (18), सुहानी (18), विनीता (18), किरण (19), कृष्णा साहू (19), निहारिका (19), पार्वती (20)। रिकॉर्ड में अधिकांश मौतों का कारण सांस लेने में तकलीफ दर्ज है।

संचालक बोल चुके- अब नहीं चलाएंगे बाल आश्रम

आश्रम संचालक सुधीरभाई गोयल एक दिन पहले ‘नईदुनिया’ से कह चुके हैं कि वे वे अब दिव्यांग बालक-बालिकाओं का आश्रम संचालित नहीं करेंगे और इस संबंध में विभाग को पत्र भेज चुके हैं। उनका दावा है कि इंदौर से आए बच्चे पहले से गंभीर बीमारियों, कुपोषण और संक्रमण से ग्रसित थे तथा मेडिकल रिकॉर्ड अधूरा था।

उन्होंने कहा कि भविष्य में वे केवल वृद्ध सेवा कार्य जारी रखेंगे। इधर, बच्चों की मौत के मामले ने प्रदेशभर के बाल देखभाल गृहों की निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। 12 मार्च की सुनवाई में निरीक्षण रिपोर्ट और विभागीय जवाब के आधार पर आगे की दिशा तय होगी।

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