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पितृ पक्ष : उज्जैन में ऋषि तलाई के गंदे पानी में पिंडदान... भक्तों की धार्मिक भावनाएं हो रहीं आहत

महालय श्राद्ध पक्ष के पहले ही दिन शनिवार को तीर्थपुरी अवंतिका में आस्था का ज्वार उमड़ा। गयाकोठा, सिद्धवट और रामघाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पितरों...और पढ़ें

By Rajesh VermaEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sat, 26 Sep 2026 08:38:09 PM (IST)Updated Date: Sat, 26 Sep 2026 08:38:09 PM (IST)
पितृ पक्ष : उज्जैन में ऋषि तलाई के गंदे पानी में पिंडदान... भक्तों की धार्मिक भावनाएं हो रहीं आहत
दुर्दशा की शिकार प्राचीन ऋषि तलाई में पिंड विसर्जन करते श्रद्धालु। फोटो नईदुनिया

HighLights

  1. आस्था : महालय श्राद्ध पक्ष के पहले ही दिन तीर्थ पर उमड़ी आस्था
  2. गयाकोठा पर दुग्धाभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं की लंबी कतार
  3. तीर्थों की बदहाल तस्वीर देखकर श्रद्धालु व्यथित हो गए

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : महालय श्राद्ध पक्ष के पहले ही दिन शनिवार को तीर्थपुरी अवंतिका में आस्था का ज्वार उमड़ा। गयाकोठा, सिद्धवट और रामघाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पितरों की प्रसन्नता और मोक्ष की कामना से तर्पण-पिंडदान करने पहुंचे। लेकिन तीर्थों की बदहाल तस्वीर देखकर श्रद्धालु व्यथित हो गए।

पुराण प्रसिद्ध ऋषितलाई में उन्हें गंदे और बदबूदार पानी के बीच बैठकर पितरों का तर्पण-पिंडदान करना पड़ा। तलाई में काई, जलीय वनस्पतियों और पूजन सामग्री के अवशेषों के बीच श्रद्धालु पिंड अर्पित करते नजर आए।गयाकोठा का महत्व बिहार के प्रसिद्ध गया तीर्थ के समान माना गया है।


मान्यता है भगवान श्रीकृष्ण ने यहां अपने गुरु सांदीपनि के पुत्रों को मोक्षप्रदान करने के लिए ऋषि तलाई में फल्गु नदी का प्राकट्य किया था। मान्यता है गयाकोठा पर पितृकर्म के बाद ऋषि तलाई में पिंड विसर्जन करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

कृष्ण काल की यह सनातन परंपरा आज भी जीवंत है, इसीलिए प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु श्राद्ध पक्ष के सोलह दिन यहां पितृकर्म करने आते हैं। हालांकि प्रशासनिक अनदेखी के कारण तीर्थ की बदहाली से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावना आहत हो रही है। शनिवार को भी सैकड़ों श्रद्धालु यहां व्यवस्था को कोसते नजर आए।

श्रद्धालुओं का कहना था कि शासन, प्रशासन को देशभर से आने वाले हजारों भक्तों की भावना का ध्यान रखते हुए तीर्थ पर साफ सफाई, शुद्ध पेयजल, पार्किंग आदि का इंतजाम कराना चाहिए।

अभिषेक के लिए लंबी कतार, शुद्ध दूध की दरकार

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गयाकोठा तीर्थ पर दुग्धाभिषेक के लिए लगी लंबी कतार। -नईदुनिया

गयकोठा तीर्थ पर प्राचीन ऋषि तलाई के अलावा भगवान विष्णु और सप्त ऋषियों के चरण चिह्न मौजूद हैं। श्राद्ध पक्ष में इनके दुग्धाभिषेक का विशेष महत्व है। मान्यता है इनकी साक्षी में श्राद्ध तथा दूध अर्पित करने से पितरों की तृप्ति, सद्गति तथा मोक्ष होता है।

इसी मान्यता के चलते श्राद्ध पक्ष के सोलह दिन हजारों श्रद्धालु यहां दुग्धाभिषेक करने आते हैं। बाहर से आने वाले कई आस्थावानों को तीर्थ पर आकर दुग्धाभिषेक के महत्व की जानकारी मिलती है, ऐसे में श्रद्धालु अगर दुग्धाभिषेक करना चाहे तो उन्हें दूध खरीदने के लिए दूर जाना पड़ता है। भक्तों की मांग है कि प्रशासन श्राद्ध पक्ष में उज्जैन दुग्ध संघ के माध्यम से यहां दूध विक्रय के लिए अस्थाई काउंटर की शुरुआत करा दे, तो सुविधा होगी।

यातायात के इंतजाम नहीं

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तीर्थ परिसर में पूजन स्थल तक खड़े वाहन। -नईदुनिया

गयाकोठा तीर्थ पर तमाम अव्यवस्था के साथ यातायात के भी इंतजाम नहीं है। तीर्थपुरोहित व पितृकर्म करने आने वाले श्रद्धालु अपने वाहनों को भीतर ऋषि तलाई तक लेकर जा रहे हैं। इससे परिसर में आवागमन बाधित हो रहा है। अभी श्राद्ध पक्ष के 15 दिन शेष हैं, प्रशासन को श्रद्धालुओं की सुविधा के व्यापक इंतजाम करना चाहिए।

आज प्रतिपदा का श्राद्ध... आराेग्य प्रदान करेगा

महालय श्राद्ध पक्ष में रविवार को प्रतिपदा का श्राद्ध रहेगा। श्री क्षेत्र पंडा समिति के पं.राजेश त्रिवेदी ने बताया रविवार को प्रतिपदा तिथि पर पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र रहेगा। प्रतिपदा तिथि श्रेष्ठ जीवन साथी तथा उत्तम संतान प्रदान करने वाली मानी गई है। रविवार का दिन आरोग्य प्रदाता है और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र अदालत के कार्यों में विजय श्री तथा शारीरिक बल प्रदान करने वाला है। इस दिन पितरों का श्राद्ध करने से उक्त फलों की प्राप्ति होती है।

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