दूरियां नहीं बनेंगी बाधा, महालय श्राद्ध में अब 'ऑनलाइन' तर्पण से पितरों को मिलेगी मुक्ति…उज्जैन से सामने आई यह व्यवस्था
महालय श्राद्ध पक्ष के पावन अवसर पर अवंतिका नगरी उज्जैन में अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म कराने के लिए देश-दुनिया से श्रद्धाल...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 26 Sep 2026 02:04:24 PM (IST)Updated Date: Sat, 26 Sep 2026 02:04:24 PM (IST)
महाकाल की नगरी उज्जैन के पावन तीर्थों पर ऑनलाइन वीडियो कॉल के जरिए श्राद्ध और तर्पण। (एआई जनरेटेड)HighLights
- उज्जैन में ऑनलाइन श्राद्ध और तर्पण की व्यवस्था सामने आई है
- रामघाट, गयाकोठा और सिद्धवट पर श्राद्ध करने से मोक्ष मिलता
- इस साल श्राद्ध पक्ष में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु और शनि है
धर्म डेस्क। महाकाल की नगरी उज्जैन की पावन तीर्थभूमि पर अपने पितरों का तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कराने की इच्छा रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए अब दूरियां बाधा नहीं बनेंगी। किसी कारणवश उज्जैन न पहुंच पाने वाले देशभर के श्रद्धालु अब 'डिजिटल' माध्यम से तीर्थ पुरोहितों से संपर्क कर ऑनलाइन श्राद्ध व तर्पण संपन्न करा रहे हैं।
महालय श्राद्ध पक्ष की शुरुआत के साथ ही तीर्थ पुरोहितों के पास ऑनलाइन बुकिंग्स की बाढ़ आ गई है।
कैसे कराया जाता है 'ऑनलाइन श्राद्ध और तर्पण'?
तीर्थ पुरोहित एंड्रॉइड स्मार्टफोन के माध्यम से श्रद्धालु (यजमान) से वीडियो कॉल पर जुड़ते हैं। श्रद्धालु अपने घर पर बैठकर हाथ में जल व तिल लेकर नाम, गोत्र और पितरों के निमित्त संकल्प लेते हैं। पुरोहित उज्जैन के सिद्धवट, रामघाट या गयाकोठा तीर्थ पर यजमान के नाम से शास्त्रों के अनुसार मंत्रोच्चार कर तर्पण, पिंडदान और पूजन कराते हैं।
क्यों उज्जैन की इसी तीर्थभूमि से पितृकर्म कराना चाहते हैं श्रद्धालु?
श्री क्षेत्र पंडा समिति के अध्यक्ष पं. राजेश त्रिवेदी (आमवाला पंडा) के अनुसार, अवंति खंड (स्कंद पुराण) में उज्जैन के तीन प्रमुख पितृ तीर्थों का विशेष उल्लेख मिलता है-
- रामघाट (पिशाचमोचन तीर्थ): मोक्षदायिनी शिप्रा का रामघाट अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि वनवास काल के दौरान भगवान श्री राम और लक्ष्मण जी ने अपने पिता महाराजा दशरथ जी की मोक्ष-कामना हेतु इसी तट पर तर्पण और पिंडदान किया था।
- गयाकोठा (खाकचौक के समीप): पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहां भगवान श्री कृष्ण ने अपने गुरु सांदीपनि के दिवंगत पुत्रों का मोक्ष कराया था और ऋषि तलाई में फल्गु नदी का प्राकट्य किया था। यहां प्राचीन सप्तऋषियों के चरण चिह्न भी मौजूद हैं।
सिद्धवट घाट (प्रेतशिला तीर्थ): शिप्रा किनारे स्थित सिद्धवट की साक्षी में पितरों का तर्पण करने से उन्हें अमर तृप्ति और मोक्ष प्राप्त होता है। इसके अलावा सिद्धवट क्षेत्र कालसर्प दोष पूजन के लिए भी प्रसिद्ध है। आज से 16 दिवसीय श्राद्ध पक्ष की शुरुआत
भाद्रपद पूर्णिमा से महालय श्राद्ध पक्ष का आरंभ हो रहा है, जो सर्वपितृ अमावस्या (10 अक्टूबर) तक चलेगा। इस बार लगभग 60 साल के बाद 6 प्रमुख ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति और शनि) की दुर्लभ स्थिति और पुनरावृत्ति योग बन रहा है। ये ग्रह तीन अलग-अलग राशियों में विराजमान रहकर पितृकर्म के फल को अनंत गुना बढ़ाएंगे।
(नोट: यह रिपोर्ट उज्जैन के तीर्थ पुरोहितों के कथनों, स्कंद पुराण और पंचांगीय मान्यताओं पर आधारित है।)
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