
राजेश वर्मा, नईदुनिया, उज्जैन : ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में इस बार दीपावली का वैभव अनूठा होगा। राजाधिराज का आंगन दीपों की आभा से दमकेगा, फुलझड़ियों की झिलमिलाहट में उत्सव के रंग बिखरेंगे।
तिथियों की घट-बढ़ से पांच दिवसीय दीपपर्व की परंपरा में भी नया रंग दिखाई देगा। 6 नवंबर को धनतेरस, 8 को दीपावली तथा 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा होगी। प्रत्येक उत्सव के बीच एक दिन का अंतर रहेगा।
महाकाल मंदिर में पूजा-अर्चना और उत्सवों के लिए ग्वालियर के पंचांग को प्रधानता दी जाती है। इस बार पंचांगीय गणना में तिथियों की घट-बढ़ से धनत्रयोदशी से गोवर्धन पूजा तक एक दिन उत्सव, अगले दिन विराम की स्थिति बनेगी। हालांकि दीपोत्सव की रौनक पांच दिन बनी रहेगी। परंपरा अनुसार पुजारी पांच दिन भगवान महाकाल की फुलझड़ियों से आरती करेंगे। मंदिर दीपों, पुष्पों और विद्युत रोशनी से जगमगाएगा। परिसर में आकर्षक रंगोली सजाई जाएगी।
6 नवंबर, धनत्रयोदशी : महाकाल को अर्पित होंगे चांदी के सिक्के
धनतेरस पर पुरोहित समिति देश, प्रदेश और नगर की सुख-समृद्धि के लिए भगवान महाकाल की विशेष पूजा-अर्चना करेगी। भगवान को चांदी के सिक्के अर्पित किए जाएंगे। समिति अध्यक्ष पं. लोकेंद्र व्यास के अनुसार ग्वालियर के पंचांग में धनत्रयोदशी की पूजा 6 नवंबर को है, इसलिए इसी दिन महापूजा होगी। हालांकि मंदिर के कैलेंडर में 6 नवंबर को कार्तिक कृष्ण द्वादशी तिथि बताई जा रही है।
8 नवंबर, दीपावली : गर्म जल से स्नान, अन्नकूट का भोग और फुलझड़ियों से आरती
रूपचतुर्दशी पर तड़के 4 बजे भस्म आरती में भगवान महाकाल के आंगन में दीपावली मनेगी। इसी दिन से भगवान को गर्म जल से स्नान कराने की परंपरा शुरू होगी। पुजारी पहले हल्दी-चंदन से स्नान कराएंगे, इसके बाद गर्म जल से अभिषेक होगा। सोने-चांदी के आभूषणों से विशेष श्रृंगार कर अन्नकूट का भोग लगाया जाएगा और फुलझड़ियों की जगमगाहट के बीच आरती होगी।
10 नवंबर, गोवर्धन पूजा : गोवर्धन के साथ पूजे जाएंगे गोवंश
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा पर मंदिर समिति ग्राम चिंतामन स्थित वैदिक शोध संस्थान की महाकालेश्वर गोशाला में गोवर्धन और गोवंश का विधि-विधान से पूजन करेगी। वेदपाठी बटुक वैदिक मंत्रोच्चार करेंगे। महाकाल मंदिर के मुख्य द्वार पर भी गोवर्धन बनाकर पूजा-अर्चना की जाएगी।
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