
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : विजयादशमी पर होने वाले रावण दहन को शास्त्र विरुद्ध बताते हुए अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने विरोध जताया है। संस्था की ओर से पं. महेश पुजारी ने मंगलवार को शहर में रावण दहन उत्सव आयोजित करने वाली समितियों के प्रमुखों को नोटिस भेजकर आयोजन बंद करने की मांग की है।
नोटिस में शास्त्रीय संदर्भों का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि भगवान श्रीराम ने रावण का वध अश्विन शुक्ल दशमी को नहीं, बल्कि चैत्र कृष्ण चतुर्दशी को किया था। इसके बावजूद दशहरे पर रावण दहन की परंपरा के तहत आयोजन किए जा रहे हैं, जो संस्था के अनुसार शास्त्रों के विपरीत हैं और इससे सनातन धर्मावलंबियों के बीच गलत संदेश जा रहा है।
नोटिस में उल्लेख किया गया है कि फाल्गुन शुक्ल प्रतिपदा से चैत्र कृष्ण चतुर्दशी तक भगवान श्रीराम और रावण के बीच कुल 87 दिन युद्ध चला। इस अवधि में विभिन्न कारणों से 15 दिन युद्ध विराम रहा। संस्था के अनुसार, चैत्र कृष्ण चतुर्दशी को भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया और चैत्र अमावस्या को उसका दहन हुआ। ऐसे में विजयादशमी पर रावण वध का प्रसंग जोड़कर पुतला दहन करना शास्त्रीय दृष्टि से उचित नहीं है।
पं. महेश पुजारी ने रावण दहन समिति के आयोजकों से शास्त्र विरुद्ध आयोजन तत्काल बंद करने की मांग की है। उनका कहना है कि शास्त्रीय तथ्यों के आधार पर दशहरे पर रावण का दहन करना उचित नहीं है। यह गलत परंपरा पड़ गई है, जिसमें दशहरे पर रावण का दहन किया जाता है। कुछ स्थानों पर आज भी चैत्र नवरात्र के बाद के दशहरे पर रावण दहन किए जाने की परंपरा है।
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