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19 अक्टूबर को एक ही दिन होगी महाअष्टमी-महानवमी पूजा, 20 अक्टूबर को दोपहर के बाद विजयादशमी

इस बार नवरात्र में महाअष्टमी और महानवमी का पूजन एक ही दिन 19 अक्टूबर को किया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सोमवार सुबह 10:52 बजे तक अष्टमी तिथि रहे...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Akriti kumari
Publish Date: Thu, 15 Oct 2026 12:02:44 PM (IST)Updated Date: Thu, 15 Oct 2026 12:02:44 PM (IST)
19 अक्टूबर को एक ही दिन होगी महाअष्टमी-महानवमी पूजा, 20 अक्टूबर को दोपहर के बाद विजयादशमी
महाअष्टमी और महानवमी का पूजन एक ही दिन 19 अक्टूबर को

धर्म डेस्क। शारदीय नवरात्र 2026 में तिथियों के अद्भुत संयोग के कारण इस वर्ष महाअष्टमी और महानवमी का पूजन एक ही दिन यानी सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को संपन्न होगा। वहीं, विजयादशमी (दशहरा) का महापर्व मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा।

इंदौर के ज्योतिषाचार्यों और पंचांगीय गणनाओं के अनुसार, उदयकालीन तिथि और तिथियों के संधिकाल के आधार पर इस बार नवरात्र पूजन का विशेष गणित बन रहा है।

बंगाली दुर्गा पूजा में 48 मिनट की 'संधि पूजा' (19 अक्टूबर)

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, बंगाली समाज की दुर्गा पूजा में अष्टमी और नवमी तिथि के संधिकाल का अत्यंत विशेष धार्मिक महत्व होता है-

  • संधि पूजा का समय: सोमवार, 19 अक्टूबर को सुबह 10:28 बजे से 11:16 बजे तक (कुल 48 मिनट)।
  • धार्मिक विधान: यह समय अष्टमी तिथि के अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि के शुरुआती 24 मिनट का मेल होता है। इस संधिकाल के दौरान मां दुर्गा के चामुंडा स्वरूप की विशेष आराधना की जाती है और 108 दीप प्रज्वलित करने की परंपरा है।

कन्या पूजन, व्रत और पारण हेतु ज्योतिषाचार्यों का परामर्श

इंदौर के ज्योतिषाचार्य डॉ. संतोष दाधीच एवं ज्योतिषी अमर डिब्बावाला के अनुसार- नवरात्र में अष्टमी, नवमी और दशमी के पूजन की परंपराएं कुल (परिवार) के रीति-रिवाज के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। जो श्रद्धालु अष्टमी पर कन्या पूजन करते हैं, वे सोमवार (19 अक्टूबर) को सुबह 10:52 बजे से पूर्व अनुष्ठान कर सकते हैं। जो नवमी पर कन्या भोज कराते हैं, वे सोमवार सुबह 10:52 बजे के बाद या मंगलवार (20 अक्टूबर) की सुबह 12:51 बजे से पहले कन्या पूजन कर सकते हैं।

व्रत खोलने (पारण), हवन, पूर्णाहुति या कलश विसर्जन के समय अपने परिवार की मान्यताओं और पंचांग का विशेष ध्यान रखें।

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