
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा बनाए जा रहे चिंतामण फोरलेन की गुणवत्ता निर्माण पूरा होने से पहले ही सवालों के घेरे में आ गई है। जंतर-मंतर के सामने करीब दो महीने पहले डाला गया सीमेंट कंक्रीट (सीसी) रोड अब जगह-जगह खराब होने लगा है।
सड़क की सतह पर गड्ढे और क्षतिग्रस्त हिस्से दिखाई देने लगे हैं, जिन्हें अब पेचवर्क कर भरने की कवायद की जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो सड़क अभी पूरी तरह तैयार भी नहीं हुई, उसकी मरम्मत की नौबत आखिर क्यों आ गई?
यह मार्ग सिंहस्थ की दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किए जा रहे इस फोरलेन का उद्देश्य सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर यातायात सुविधा देना है। लेकिन शुरुआती दौर में ही सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठने से निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क बनने के कुछ ही सप्ताह बाद इसकी सतह खराब होने लगी थी। अब जिन हिस्सों में गड्ढे बने हैं, वहां नया कंक्रीट डालकर पैबंद लगाए जा रहे हैं। इससे यह आशंका भी गहरा गई है कि यदि अभी यह स्थिति है तो भारी यातायात शुरू होने के बाद सड़क कितनी टिकाऊ साबित होगी।
मामला ऐसे समय सामने आया है, जब प्रदेश सरकार ने सिंहस्थ-2028 से जुड़े 18,400 करोड़ रुपये से अधिक के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार की कंपनी सर्टिफिकेशन इंजीनियर्स इंटरनेशनल लिमिटेड (सीइआइएल) को थर्ड पार्टी ऑडिट की जिम्मेदारी सौंपी है। यह एजेंसी निर्माण के हर चरण में सामग्री, तकनीकी मानकों, डिजाइन और गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच करेगी।
संभागायुक्त एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने निर्माण कार्यों के दस्तावेज और प्रगति पूरी तरह अपडेट रखें, ताकि निरीक्षण में किसी प्रकार की कमी न रहे। ऐसे में चिंतामण फोरलेन का यह मामला स्वतंत्र गुणवत्ता जांच की आवश्यकता को और मजबूत करता है। यदि निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता में कमी सामने आ रही है तो समय रहते इसकी जांच और जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा।
पिछले सिंहस्थ में बने कई पुल, सड़कें और घाट आयोजन के कुछ समय बाद ही क्षतिग्रस्त हो गए थे। इन्हीं अनुभवों के आधार पर इस बार सरकार ने हर बड़े प्रोजेक्ट का थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट कराने का निर्णय लिया है। बावजूद इसके, निर्माणाधीन सड़क पर दो महीने में ही पैचवर्क की नौबत आना गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सीइआइएल की जांच में इस सड़क की गुणवत्ता को लेकर क्या रिपोर्ट सामने आती है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।