
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : शक्तिपीठ हरसिद्धि मंदिर में शारदीय नवरात्र के पहले दिन रविवार को देशभर से आए 60 हजार से अधिक भक्तों ने माता हरसिद्धि के दर्शन किए। महापर्व पर माता हरसिद्धि का विशेष शृंगार किया गया।
मंदिर की परंपरा अनुसार नवरात्र के नौ दिन शयन आरती नहीं होगी। पुजारी नौ दिन निरंतर देवी की पूजा अर्चना करेंगे। पं. रामचंद्र गिरि ने बताया माता हरसिद्धि को मंगल चंडी भी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, चंड और प्रचंड नाम के दैत्यों का वध करने पर भगवान शिव ने देवी चंडी को हरसिद्धि होने का वरदान दिया।
मान्यता है कि भक्तों के कार्य सिद्ध करने वाली देवी हरसिद्धि के दरबार में वर्षभर श्रद्धालु मनोकामना लेकर पहुंचते हैं। शारदीय और चैत्र नवरात्र में यहां की ऊंची दीपमालाओं को प्रज्ज्वलित करने की परंपरा मंदिर की विशेष पहचान है।
शक्तिपीठ हरसिद्धि देश के 52 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है यहां माता सती के दाहिने हाथ की कोहनी गिरी थी। माता हरसिद्धि को मंगल चंडी भी कहा जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार चंड-प्रचंड नाम के दो दैत्य कैलाश पर्वत पर प्रवेश करने लगे। भगवान नंदीजी ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन युद्ध में नंदी घायल हो गए। इस पर शिव ने देवी चंडी को दोनों दैत्यों का संहार करने को कहा।
शिव के आदेश से देवी ने दोनों का वध कर दिया। इससे शिव प्रसन्न हुए और उन्हें हरसिद्धि होने का वरदान दिया। मान्यता है जो हर कार्य सिद्ध कर दें, वहीं हरसिद्धि है। इसलिए वर्षभर भक्त अपनी मनोकामना लेकर माता के दरबार में आते हैं। शारदीय व चैत्र नवरात्र में देवी के दरबार में दीपमालिका प्रज्वलित की जाती है।
शनिवार शाम माता हरसिद्धि का आंगन आस्था के उजियारे से दमक उठा। एक दिन पहले ही हजारों भक्त संध्या आरती में शामिल हुए और दीपमालिका के दर्शन किए। परंपरा अनुसार 11 से 19 अक्टूबर तक नवरात्र के नौ दिन मंदिर में शयन आरती नहीं होगी। पुजारी निरंतर देवी की पूजा अर्चना करेंगे।
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