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उज्जैन में 509 करोड़ की सीवरेज परियोजना का अधूरा काम पूरा करने से ‘टाटा’ कंपनी ने हाथ खींचे, काम किया बंद

Ujjain News: उज्जैन में समय से पिछड़ी 509 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी सीवरेज परियोजना का अधूरा काम पूरा करने से ‘ब्लैक लिस्ट’ हैदराबाद की टाटा प्रोजे...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: manoj dubey
Publish Date: Tue, 13 Jan 2026 11:08:32 AM (IST)Updated Date: Tue, 13 Jan 2026 11:08:32 AM (IST)
उज्जैन में 509 करोड़ की सीवरेज परियोजना का अधूरा काम पूरा करने से ‘टाटा’ कंपनी ने हाथ खींचे, काम किया बंद
‘टाटा’ कंपनी ने उज्जैन में 509 करोड़ की सीवरेज परियोजना का अधूरा काम पूरा करने से हाथ खींचे

HighLights

  1. निगम की तरफ से वैधानिक कार्रवाई नहीं की जा रही
  2. आठ बार समयसीमा बढ़ाने के बावजूद काम अधूरा
  3. डेढ़ वर्ष पहले भुगतान राेकने पर किया था काम बंद

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। समय से पिछड़ी 509 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी सीवरेज परियोजना का अधूरा काम पूरा करने से ‘ब्लैक लिस्ट’ हैदराबाद की टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड कंपनी ने हाथ पीछे खींच, साइट पर काम बंद कर दिया है। महत्वपूर्ण विषय ये है कि इस मनमानी पर निगम की तरफ से न ठेका समाप्त किया जा रहा है और ना ठेकेदार फर्म के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

प्रोजेक्ट की निगरानी कर रही कंसल्टिंग फर्म के अनुसार टाटा कंपनी ने अपने पेटी कॉंट्रेक्टर और मटेरियल सप्लायरों के बिलों का भुगतान भी नहीं किया है। ये बिल 20 करोड़ से अधिक राशि के हैं।

कंपनी को कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए थे

मालूम हो कि सीवरेज प्रोजेक्ट में लगातार देरी, वादाखिलाफी और अत्यंत धीमी प्रगति को देखते हुए नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने 19 नवंबर 2025 को टाटा प्रोजेक्ट्स को तीन वर्षों के लिए निगम के सभी विभागों से ब्लैकलिस्ट कर दिया था।


हालांकि उस समय ठेका निरस्त नहीं किया गया और कंपनी को अंतिम अवसर देते हुए कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके जमीनी स्तर पर हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ गए। शिप्रा नदी की शुद्धि और शहर को खुले में बहते सीवरेज से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस परियोजना का अब भी 9.5 प्रतिशत काम शेष है।

आठ बार समयसीमा बढ़ाने के बावजूद काम अधूरा

गौरतलब है कि 7 नवंबर 2017 को दिया गया यह ठेका दो वर्ष में, यानी 20 नवंबर 2019 तक पूरा होना था। आठ बार समयसीमा बढ़ाने के बावजूद आठ साल बीत जाने के बाद भी करीब 10 प्रतिशत कार्य अधूरा है। 60 हजार हाउस सर्विस कनेक्शन के लक्ष्य के मुकाबले अब तक सिर्फ 15,158 कनेक्शन ही किए जा सके हैं।

अफसर के अनुसार जनवरी से अक्टूबर 2025 के बीच टाटा प्रोजेक्ट्स को 46.23 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, इसके बावजूद कंपनी ने अपने वेंडरों और ठेकेदारों को भुगतान नहीं किया। इसका सीधा असर सिंहस्थ-2028 से जुड़े सड़क चौड़ीकरण, पाइपलाइन समन्वय और अन्य विकास कार्यों पर भी पड़ रहा है।

अब यदि तत्काल काम शुरू नहीं हुआ, तो अनुबंध शर्तों के उल्लंघन में बैंक गारंटी जब्त कर ठेका निरस्त किया जा सकता है और शेष कार्य किसी अन्य एजेंसी से कराया जाएगा।

डेढ़ वर्ष पहले भुगतान राेकने पर किया था काम बंद

डेढ़ वर्ष पहले जुलाई-2024 में भी टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने 37 करोड़ रुपये के बिलों के भुगतान नगर निगम की तरफ से राेके जाने पर काम बंद कर दिया था। तब भुगतान होने के बाद ही कंपनी ने दोबारा काम शुरू किया था। उस समय कंपनी ने नगर निगम पर बिलों का भुगतान न करने, कथित पैनाल्टी लगाने और कार्य में सहयोग न देने के आरोप लगाए थे।

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80 प्रतिशत से ज्यादा भुगतान प्राप्त कर चुकी कंपनी

महत्वपूर्ण बात ये है कि टाटा कंपनी सीवरेज प्रोजेक्ट का 80 प्रतिशत से ज्यादा भुगतान प्राप्त कर चुकी है। कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है। ऐसे में आगे मामला कोर्ट में भी खींचने की कवायद है।

पूरे मामले में प्रोजेक्ट समयसीमा में कराने के लिए नगर निगम के किसी भी अधिकारी या निगरानीशुदा कंसलिटंग फर्म पर कोई वैधानिक कार्रवाई अब तक प्रस्तावित नहीं की गई है।