
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर अपने प्राचीन वैभव और स्वर्णिम आभा में और वृद्धि करेगा। मंदिर के मुख्य शिखर से लेकर छोटी-छोटी स्वर्णमंडित शिखरियों तक का जीर्णोद्धार किया जाएगा। समय के साथ मंदिर की प्राचीन संरचना में आई दरारों को भरकर भवन को मजबूती प्रदान की जाएगी।
शिखर पर क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत के साथ स्वर्ण सज्जा का भी नवीनीकरण होगा। केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रुड़की के विशेषज्ञों के निर्देशन में होने वाले इस महत्वपूर्ण कार्य की तैयारी शुरू हो गई है। मंदिर के शिखर और बाहरी हिस्सों तक पहुंचने के लिए मचान बनाए जा रहे हैं।
मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया महाकाल मंदिर की प्राचीन स्थापत्य कला और ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसके लिए आधुनिक मशीनों के बजाय परंपरागत तकनीक और सामग्री का उपयोग होगा। मंदिर के शिखर, दीवारों तथा अन्य हिस्सों में जहां भी दरारें और टूट-फूट दिखाई दे रही हैं, उनकी मरम्मत की जाएगी।
विशेष रूप से मुख्य शिखर और उसके आसपास की छोटी शिखरियों पर ध्यान दिया जाएगा। मंदिर पर पूर्व से चढ़े रंग को हटाकर प्राचीन स्वरूप के अनुरूप नया रंग किया जाएगा। केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान के निर्देशन में यह काम उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा। जीर्णोद्धार पर 10.27 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
महाकाल मंदिर के मुख्य शिखर सहित आसपास की छोटी शिखरियों पर स्वर्ण सज्जा की गई है। जीर्णोद्धार के दौरान इन हिस्सों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। जहां स्वर्ण सज्जा पुरानी अथवा क्षतिग्रस्त हो गई है, वहां आवश्यकतानुसार उसका नवीनीकरण किया जाएगा। शिखरों की मरम्मत और स्वर्ण सज्जा के काम से मंदिर की भव्यता में और निखार आएगा। जीर्णोद्धार पूरा होने के बाद मंदिर का शिखर नए स्वरूप में दमकता नजर आएगा।
महाकाल मंदिर के जीर्णोद्धार में प्राचीन भारतीय निर्माण पद्धति का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए गोंद, गुड़, चूना, उड़द और मेथीदाना जैसी सामग्री काम में ली जाएगी। शिखर के जिन हिस्सों पर पुराना जीर्ण शीर्ण निर्माण है, उसे इसी पद्धति से दुरुस्त किया जाएगा। मंदिर की दीवारों और शिखर की दरारों को भरने में सीमेंट तथा आधुनिक रसायनों का उपयोग नहीं होगा। विशेषज्ञों का उद्देश्य प्राचीन निर्माण शैली को सुरक्षित रखते हुए मंदिर की संरचना को मजबूती प्रदान करना है।
मंदिर प्रशासन ने जीर्णोद्धार का काम महाशिवरात्रि 2027 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए तेजी से तैयारियां की जा रही हैं। मंदिर परिसर में मचान बनाने का काम शुरू हो चुका है। निर्माण कार्य के दौरान मंदिर की प्राचीन दीवारों और नक्काशी को नुकसान न पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। मचान तैयार होने के बाद विशेषज्ञों की देखरेख में मरम्मत और रंगरोगन का कार्य आगे बढ़ेगा।