
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : राणोजी की छत्री रामघाट से होने वाली पारंपरिक मां शिप्रा आरती को लेकर चल रहा विवाद अब हाई कोर्ट पहुंच गया है। श्री क्षेत्र पंडा समिति उज्जैन ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर कर पारंपरिक आरती में शासन-प्रशासन के हस्तक्षेप पर रोक लगाने की मांग की है।
श्री क्षेत्र पंडा समिति के अध्यक्ष पंडित राजेश त्रिवेदी आम वाला पंडा ने पत्रकार वार्ता में श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति द्वारा शिप्रा आरती में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए कहा कि मंदिर समिति पारंपरिक शिप्रा आरती में बाधा डाली जा रही है।
याचिका में आरती शांतिपूर्वक करने की अनुमति और उसे बंद न करने के निर्देश देने की मांग की गई है। पंडा समिति का कहना है कि राणोजी की छत्री से मां शिप्रा की सांध्यकालीन आरती की परंपरा लंबे समय से तीर्थ पुरोहितों द्वारा निभाई जा रही है। इसके स्थान पर महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के माध्यम से आरती कराने का प्रयास तीर्थ परंपरा में हस्तक्षेप है।
तीर्थ पुरोहितों ने शिप्रा आरती को इवेंट बनाकर ठेकेदारों को ठेका देने का भी विरोध किया है। समिति ने इसे धर्मशास्त्रीय अनुशासन और तीर्थ परंपरा के सम्मान के विपरीत बताया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि केवल नए यूनिटी मॉल में आरती आयोजन के लिए टेंडर होने के आधार पर रामघाट पर चली आ रही पारंपरिक आरती को बाधित नहीं किया जाना चाहिए। पुरोहितों ने कहा कि विकास का विरोध नहीं, लेकिन उज्जैन की प्राचीन तीर्थ परंपरा से छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी।
महाकाल मंदिर प्रबंध समिति द्वारा आरती प्रारंभ करने पर तीर्थ पुरोहित ने नाराजगी जाहिर की है। इसके विरोध में देशभर के प्रमुख तीर्थ के तीर्थ पुरोहित 9 अक्टूबर को उज्जैन में आ रहे हैं। इसमें प्रयागराज, काशी, हरिद्वार, नासिक आदि के तीर्थ पुरोहित शामिल हैं। वे धर्मसभा कर शासन-प्रशासन के सामने अपनी बात रखेंगे।
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