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उज्जैन में रंगबिरंगी रोशनी से जगमगाया शक्तिपीठ हरसिद्धि : यहां माता सती के सीधे हाथ की कोहनी गिरी थी

शक्तिपीठ हरसिद्धि देश के 52 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है यहां माता सती के दाहिने हाथ की कोहनी गिरी थी। माता हरसिद्धि को मंगल चंडी भी कहा जाता ह...और पढ़ें

By Rajesh VermaEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sun, 11 Oct 2026 09:52:47 AM (IST)Updated Date: Sun, 11 Oct 2026 09:52:47 AM (IST)
उज्जैन में रंगबिरंगी रोशनी से जगमगाया शक्तिपीठ हरसिद्धि : यहां माता सती के सीधे हाथ की कोहनी गिरी थी
शक्तिपीठ हरसिद्धि माता मंदिर में दर्शन करने पहुंचे सैंकड़ों श्रद्धालु। -प्रकाश प्रजापत

HighLights

  1. शक्तिपीठ हरसिद्धि देश के 52 शक्तिपीठों में से एक है
  2. मान्यता है यहां माता सती के दाहिने हाथ की कोहनी गिरी थी
  3. माता हरसिद्धि को मंगल चंडी भी कहा जाता है

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : शारदीय नवरात्र की पूर्व संध्या पर शनिवार शाम माता हरसिद्धि का आंगन आस्था के उजियारे से दमक उठा। एक दिन पहले ही हजारों भक्त संध्या आरती में शामिल हुए और दीपमालिका के दर्शन किए। परंपरा अनुसार 11 से 19 अक्टूबर तक नवरात्र के नौ दिन मंदिर में शयन आरती नहीं होगी। पुजारी निरंतर देवी की पूजा अर्चना करेंगे। मंदिर को आकर्षक रोशनी से सजाया गया है।

मान्यता है यहां माता सती के दाहिने हाथ की कोहनी गिरी थी

शक्तिपीठ हरसिद्धि देश के 52 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है यहां माता सती के दाहिने हाथ की कोहनी गिरी थी। माता हरसिद्धि को मंगल चंडी भी कहा जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार चंड-प्रचंड नाम के दो दैत्य कैलाश पर्वत पर प्रवेश करने लगे। भगवान नंदीजी ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन युद्ध में नंदी घायल हो गए। इस पर शिव ने देवी चंडी को दोनों दैत्यों का संहार करने को कहा।


शिव के आदेश से देवी ने दैत्य चंड व प्रचंड का वध कर दिया

शिव के आदेश से देवी ने दोनों का वध कर दिया। इससे शिव प्रसन्न हुए और उन्हें हरसिद्धि होने का वरदान दिया। मान्यता है जो हर कार्य सिद्ध कर दें, वहीं हरसिद्धि है। इसलिए वर्षभर भक्त अपनी मनोकामना लेकर माता के दरबार में आते हैं। शारदीय व चैत्र नवरात्र में देवी के दरबार में दीपमालिका प्रज्वलित की जाती है।

शक्तिपीठ हरसिद्धि माता मंदिर में दर्शन करने पहुंचे सैंकड़ों श्रद्धालु

शनिवार शाम माता हरसिद्धि का आंगन आस्था के उजियारे से दमक उठा। एक दिन पहले ही हजारों भक्त संध्या आरती में शामिल हुए और दीपमालिका के दर्शन किए। परंपरा अनुसार 11 से 19 अक्टूबर तक नवरात्र के नौ दिन मंदिर में शयन आरती नहीं होगी। पुजारी निरंतर देवी की पूजा अर्चना करेंगे।

घट स्थापना के शुभ मुहूर्त

  • सुबह 8 से 9.30 बजे तक चंचल
  • सुबह 9.30 से 11 बजे तक लाभ
  • सुबह11 से दोपहर 12.30 बजे तक अमृत
  • दोपहर 11.50 से 12.40 बजे तक अभिजीत
  • दोपहर 2 से 3.30 बजे तक शुभ

( मुहूर्त : ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला के अनुसार )

यह भी पढ़ें- हरसिद्धि माता मंदिर : महाकाल नगरी उज्जैन में स्थित यह शक्तिपीठ, जहां गिरी थी माता सती की दाहिनी कोहनी