
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : रेलवे स्टेशन पर वेंडिंग व्यवस्था में भारी धांधली सामने आने के बाद अब इसकी जांच का दायरा पूरे रतलाम रेल मंडल तक बढ़ा दिया गया है। मंडल के सभी प्रमुख स्टेशनों और ट्रेनों में वेंडरों की पहचान और उनके दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा।
उज्जैन में कार्रवाई के दौरान संदिग्ध वेंडरों के आई कार्ड जब्त किए गए थे। जांच में यह भी सामने आया था कि ट्रेन साइड वेंडिंग (टीएसवी) योजना के तहत चार वेंडरों की अनुमति वाली कुछ ट्रेनों में 16 से 18 लोग तक सामान बेच रहे थे।
अब रेलवे यह पता लगाने में जुटा है कि यह गड़बड़ी फर्जी आई कार्ड के जरिए हो रही थी या ठेकेदार ने नियमों को ताक पर रखकर निर्धारित संख्या से अधिक वेंडर तैनात कर दिए थे। मामले में कुछ रेलवे अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हुए हैं।
रतलाम मंडल में टीएसवी योजना का ठेका कौशल इंटरप्राइजेज को करीब 90 लाख रुपये में तीन साल के लिए दिया गया है। इसकी अवधि 29 दिसंबर 2025 से 28 दिसंबर 2028 तक है। अनुबंध के अनुसार प्रीमियम ट्रेनों को छोड़कर अन्य ट्रेनों में अधिकतम चार वेंडर ही काम कर सकते हैं। प्रत्येक वेंडर के पास रेलवे का अधिकृत पहचान पत्र, निर्धारित ड्रेस और मेडिकल संबंधी दस्तावेज होना अनिवार्य है। इसके बावजूद कुछ ट्रेनों में अनुमति से चार गुना तक अधिक वेंडरों का मिलना ठेकेदार की कार्यप्रणाली और रेलवे की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
आरपीएफ और कमर्शियल विभाग ने संदिग्ध वेंडरों के आईकार्ड का सत्यापन शुरू कर दिया है। कार्ड पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन कर वेंडर का नाम, पिता का नाम और कार्ड नंबर की जानकारी निकाली जा रही है। इसका मिलान कमर्शियल विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई अधिकृत सूची से किया जा रहा है। अब किसी व्यक्ति के पास केवल आई कार्ड होना उसकी वैधता का प्रमाण नहीं माना जाएगा। सूची में नाम नहीं मिलने पर उसे अनधिकृत वेंडर मानकर कार्रवाई की जाएगी।
रेलवे की जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि निर्धारित चार वेंडरों के स्थान पर 16 से 18 लोगों को किसकी अनुमति से लगाया गया था। क्या एक ही अधिकृत आई कार्ड पर दूसरे लोग काम कर रहे थे या फर्जी पहचान पत्र तैयार कर वेंडरों को ट्रेनों में प्रवेश दिया जा रहा था? इन बिंदुओं पर जांच की जा रही है। उज्जैन में सामने आई गड़बड़ी की रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जा चुकी है। मंडल के अन्य स्टेशनों और ट्रेनों में जांच के बाद ही वेंडिंग ठेके की निगरानी व्यवस्था में सामने आई अनियमितताओं की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पूरे मंडल में ट्रेनाें व स्टेशन पर अवैध वेंडरों की जांच का अभियान चलाया जा रहा है। समय-समय पर इस तरह की कार्रवाई की जाती रही है। -मुकेश कुमार पांडेय, पीआरओ, रतलाम मंडल
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