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उज्जैन में शिप्रा तट पर दिखने लगा मारवाड़ के राष्ट्रवीर दुर्गादास राठौर का ‘विरासत संसार’, संवर रही 300 वर्ष प्राचीन छत्री

धर्मनगरी उज्जैन में शिप्रा के पावन तट पर स्थित मारवाड़ के राष्ट्रवीर दुर्गादास राठौर की 300 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक छत्री अब केवल एक स्मारक तक सीमित नहीं...और पढ़ें

By Dheeraj GomeEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Wed, 14 Oct 2026 10:55:17 AM (IST)Updated Date: Wed, 14 Oct 2026 10:55:17 AM (IST)
उज्जैन में शिप्रा तट पर दिखने लगा मारवाड़ के राष्ट्रवीर दुर्गादास राठौर का ‘विरासत संसार’, संवर रही 300 वर्ष प्राचीन छत्री
शिप्रा नदी के किनारे वीर दुर्गादास परिसर में चल रहा रिटेनिंग वाल और लैंडस्केपिंग का कार्य। जल्द ही यहां एक भव्य 'लिविंग हेरिटेज डेस्टिनेशन' आकार लेगा। -नईदुनिया

HighLights

  1. सिंहस्थ-2028 से पहले ‘लिविंग हेरिटेज’ के रूप में निखरेगा पूरा परिसर
  2. मजबूत रिटेनिंग वाल और भव्य स्ट्रक्चर से बदला जा रहा छत्री का स्वरूप
  3. इतिहास, आस्था और पर्यटन का बनेगा अनूठा संगम

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : धर्मनगरी उज्जैन में शिप्रा के पावन तट पर स्थित मारवाड़ के राष्ट्रवीर दुर्गादास राठौर की 300 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक छत्री अब केवल एक स्मारक तक सीमित नहीं रहेगी। सिंहस्थ-2028 की महातैयारियों के बीच इस स्थल को विश्वस्तरीय ‘लिविंग हेरिटेज डेस्टिनेशन’ के रूप में आकार दिया जा रहा है।

ताजा ड्रोन तस्वीर और जमीनी तस्वीरों से साफ जाहिर होता है कि परियोजना का काम अब तेजी से धरातल पर आकार लेने लगा है। नदी तट के साथ-साथ मजबूत रिटेनिंग वॉल का निर्माण, सुरक्षा घेरा, सीढ़ीदार लैंडस्केपिंग और भव्य कॉम्प्लेक्स के कंक्रीट ढांचों की रीढ़ खड़ी हो चुकी है।


52.69 करोड़ की महायोजना से भव्य स्वरूप

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा 27 अगस्त 2025 को 52.69 करोड़ रुपये की इस महात्वाकांक्षी परियोजना का भूमि पूजन किया गया था। एक वर्ष से अधिक समय में योजना ने रफ्तार पकड़ी है और अब निर्माण कार्य स्पष्ट रूप से नजर आने लगा है।

परियोजना के अंतर्गत वीर दुर्गादास की विशाल व भव्य प्रतिमा, अत्याधुनिक संग्रहालय, ओपन एयर थिएटर, हरित उद्यान, हॉर्स ट्रैक (घुड़सवारी मार्ग), गतिविधि क्षेत्र और विशाल पार्किंग व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसका मुख्य ध्येय पुरानी छतरी के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक स्वरूप को सहेजते हुए पर्यटकों को आधुनिक पर्यटन का यादगार अनुभव प्रदान करना है।

130 मीटर लंबा पैदल पुल बदलेगा कनेक्टिविटी

परियोजना की सबसे बड़ी खासियत शिप्रा नदी पर बनने वाला 130 मीटर लंबा और 4 मीटर चौड़ा आरसीसी पैदल पुल है। लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह पैदल सेतु वीर दुर्गादास छतरी परिसर को सीधे रणजीत हनुमान मंदिर मार्ग से जोड़ देगा। इस पुल के बनने से महाकाल लोक, रणजीत हनुमान मंदिर, शिप्रा तट और दुर्गादास छतरी तक श्रद्धालुओं की पैदल आवाजाही बेहद सुगम हो जाएगी। श्रद्धालुओं को अब लंबा चक्कर नहीं काटना पड़ेगा, जिससे सिंहस्थ के दौरान भीड़ प्रबंधन भी व्यवस्थित और सहज होगा।

संभागायुक्त का विजन: श्रद्धालु सिर्फ दर्शन न करें, इतिहास जीकर लौटें

संभागायुक्त सह सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह के अनुसार, यह केवल संरक्षण का कार्य नहीं बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक विरासत को नया आयाम देने वाली दूरगामी योजना है। उनका विजन है कि महाकाल दर्शन के लिए आने वाले लाखों श्रद्धालु शिप्रा किनारे कुछ समय ठहरें, वीर दुर्गादास के शौर्य व स्वाभिमान के इतिहास को जानें और एक सुखद स्मृति लेकर लौटें। अधिकारियों को री-प्लान ड्राइंग और डिजाइन को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए गए हैं।

कौन थे राष्ट्रवीर दुर्गादास राठौर

मारवाड़ (राजस्थान) के अमर योद्धा वीर दुर्गादास राठौर (1638–1718) ने मुगल सम्राट औरंगजेब के भीषण दमन और षड्यंत्रों के खिलाफ लगातार संघर्ष किया। उन्होंने महाराजा जसवंत सिंह के उत्तराधिकारी कुंवर अजीत सिंह की रक्षा की और मारवाड़ की स्वतंत्रता अक्षुण्ण रखी। जीवन के उत्तरार्ध में वे उज्जैन पधारे, जहां 1718 में शिप्रा तट पर उनका देहावसान हुआ। उनकी छतरी आज भी देशप्रेम, राष्ट्रनिष्ठा और अदम्य साहस की अनूठी प्रतीक है।

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