
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : उज्जैन के गीता भवन में गुरुवार से सेवाज्ञ संस्थानम् की तीन दिवसीय युवा धर्म संसद शुरू हुई। संसद के पहले दिन युवा पंचायत हुई, जिसमें देशभर से आए 1200 युवाओं के बीच चयनित 16 युवाओं ने धर्म, युवा और बदलते भारत की चुनौतियों जैसे अलग-अलग विषयों पर खुलकर विचार व्यक्त किए।
मध्यप्रदेश युवा आयोग के अध्यक्ष प्रवीण शर्मा, झारखंड की आईएएस निशा उरांव और भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान बृजेश कुमार ने युवाओं से संवाद किया। अध्यक्षता सेवाज्ञ संस्थानम् के कार्यक्रम संयोजक डा. श्याम सिंह ने की।
प्रवीण शर्मा ने कहा कि युवा अवस्था तन की नहीं, मन की अवस्था है। युवा केवल प्रश्न खड़ा करने वाला नहीं, उसके उत्तर और समाधान तलाशने वाला भी है। उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर है। युवाओं को फेक नैरेटिव से बचना होगा और ऐसा कंटेंट तैयार करना होगा, जो समाज को समाधान की दिशा दिखाए।
डिजिटल इंडिया के साथ जिम्मेदार इंडिया बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज का युवा केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, रोजगार देने वाला भी बन सकता है। स्टार्टअप और नए विचारों के माध्यम से स्थानीय समस्याओं के समाधान खोजे जा सकते हैं। अपनी आस्था से भीतर की शक्ति जगाकर उसे लोकमंगल के काम में लगाने का भी उन्होंने युवाओं से आह्वान किया।
युवा पंचायत के बाद गीता भवन परिसर में पुस्तक मेला एवं प्रदर्शनी का शुभारंभ पद्मश्री मूर्तिकार अद्वैत चरण गणनायक, नईदुनिया के संपादक सद्गुरु शरण अवस्थी और कार्यक्रम संयोजक अंकिता जायसवाल ने किया।
निशा उरांव ने युवा शक्ति की तुलना तेज प्रवाह वाली नदी से करते हुए कहा कि सही दिशा मिले तो यही ऊर्जा विकास का माध्यम बनती है, लेकिन दिशा नहीं मिले तो बाढ़ जैसी स्थिति पैदा कर सकती है। युवाओं को अवसर का इंतजार करने के बजाय अवसर पैदा करना चाहिए।
उन्होंने उद्यमिता के साथ सामाजिक उद्यमिता पर जोर दिया। कहा कि सामाजिक समस्याओं का समाधान व्यावसायिक प्रक्रिया के माध्यम से भी किया जा सकता है। सोशल मीडिया के दौर में बिना जांचे किसी सूचना पर भरोसा नहीं करने की सलाह देते हुए उन्होंने ‘इंफॉर्मेशन डाइट’ की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और सामाजिक स्मृति से जुड़े रहना चाहिए।
बृजेश कुमार ने युवाओं से अपने संघर्ष की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि 17 वर्षों के संघर्ष के बाद 2017 में भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम में खेलने का अवसर मिला। 2023 में भारत-नेपाल श्रृंखला में उन्होंने टीम की कप्तानी की। उन्होंने कहा कि सफलता केवल उपलब्धि हासिल करना नहीं, बल्कि जीवन में खुशी तलाशना भी है। युवाओं को अपना रास्ता खुद चुनना चाहिए और परिवार, समाज तथा गुरु का मार्गदर्शन लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
शुक्रवार सुबह 10 बजे युवा धर्म संसद का विधिवत शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा. मोहन भागवत करेंगे। इस अवसर पर सेवाज्ञ संस्थानम् के आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण महाराज, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु श्रीनिवास वरखेड़ी और सेवाज्ञ संस्थानम् के अध्यक्ष आशीष कुमार आशु उपस्थित रहेंगे।
उद्घाटन के बाद दोपहर 12 बजे ‘धर्म की अस्तित्वपरक अवधारणा एवं चारित्रिक उत्तरदायित्व’ विषय पर व्याख्यान सत्र होगा। इसमें जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी महाराज, गीतकार मनोज मुंतशिर, प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, अनादि फाउंडेशन की सहसंस्थापिका स्मृति अनंतलक्ष्मी और प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे. नंद कुमार विचार रखेंगे।
शाम 4 बजे ‘निरंकुश संवाद-पद्धति तथा सूचना एवं विचार का संघर्ष’ विषय पर संवाद सत्र होगा। इसमें आध्यात्मिक वक्ता आचार्य पुंडरीक गोस्वामी महाराज, मां सद्विद्यानंद, दैनिक जागरण समूह के कार्यकारी संपादक विष्णु प्रकाश त्रिपाठी और भारतीय प्रबंध संस्थान इंदौर के निदेशक प्रो. हिमांशु राय विचार व्यक्त करेंगे। आयोजन में खास फोकस इस बात पर रहेगा कि आज के युवाओं के मन में धर्म, राष्ट्र और समाज को लेकर कौन से सवाल हैं और संवाद के माध्यम से उनके क्या उत्तर सामने आते हैं।
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