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उज्जैन एयरपोर्ट : पर्यावरणीय मंजूरी के लिए जनसुनवाई 18 सितंबर को, अक्टूबर तक अधिग्रहण पूरा करने का लक्ष्य

Ujjain Airport: उज्जैन के नरवर क्षेत्र में प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड 18 सितंबर को ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Tue, 18 Aug 2026 01:07:45 PM (IST)Updated Date: Tue, 18 Aug 2026 01:21:04 PM (IST)
उज्जैन एयरपोर्ट : पर्यावरणीय मंजूरी के लिए जनसुनवाई 18 सितंबर को, अक्टूबर तक अधिग्रहण पूरा करने का लक्ष्य
उज्जैन एयरपोर्ट बनाने के लिए तेजी से शुरू होगा काम। - फाइल फोटो

HighLights

  1. सरकार की जमीन एएआई को सौंपी, निजी जमीन की प्रक्रिया निर्णायक दौर में
  2. प्रस्तावित एयरपोर्ट का कुल क्षेत्रफल 135.977 हेक्टेयर है
  3. निजी जमीन के अधिग्रहण में दताना-मताना और नरवर के कई सर्वे नंबर शामिल

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। उज्जैन में एयरपोर्ट बनाने की तैयारी कागजों से निकलकर जमीन अधिग्रहण की निर्णायक परीक्षा में पहुंच गई है। नरवर क्षेत्र में प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए पर्यावरणीय मंजूरी देने को जनसुनवाई 18 सितंबर को नरवर में होना है। इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तैयारी शुरू की है। कहा गया है कि प्रशासन प्रभावित जमीन मालिकों की आपत्ति और सुझाव पर इस दिन निर्णय लेगा।

आपत्तियों को निराकृत कर अक्टूबर तक भूमि अधिग्रहण पूरा करने की कोशिश है। यानी एयरपोर्ट की समयसीमा में अब सबसे अहम कड़ी रनवे या टर्मिनल नहीं, बल्कि जमीन है। अधिग्रहण में देरी हुई तो निर्माण एजेंसी को साइट सौंपने और काम शुरू करने का समय लगातार घटता जाएगा।


अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू की गई थी

प्रस्तावित एयरपोर्ट का कुल क्षेत्रफल 135.977 हेक्टेयर है। इसके लिए सरकारी जमीन भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआइ) को सौंपी जा चुकी है, जबकि निजी जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। पहले चरण में करीब 111.87 हेक्टेयर यानी लगभग 276 एकड़ निजी जमीन के अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू की गई थी। दताना-मताना क्षेत्र के सर्वे नंबर 407, 408, 415, 419, 619, 627, 411, 405, 782, 830, 835 तथा नरवर क्षेत्र के सर्वे नंबर 11, 146, 147, 201, 227, 925 और 931 सहित जमीनें परियोजना के दायरे में आ रही हैं।

प्रशासन ने सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट और प्रभावित पक्षों से संवाद की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई है। एयरपोर्ट विस्तार की तस्वीर केवल जमीन तक सीमित नहीं है। सरकार ने परियोजना के लिए 590 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। एएआइ ने निर्माण को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया है। पहले चरण में करीब 147.36 करोड़ रुपये से मौजूदा दताना-मताना हवाई पट्टी का कायाकल्प, नया 1800 मीटर रनवे, टैक्सी-वे, एप्रन, आइसोलेशन-वे, पेरिफेरल रोड और करीब 7.8 किलोमीटर आपरेशनल बाउंड्रीवॉल जैसी सुविधाएं विकसित की जानी हैं।

लक्ष्य एटीआर-72 श्रेणी के विमानों के संचालन योग्य सुविधा तैयार करना है। दूसरे चरण में करीब 125 करोड़ रुपये से नया डोमेस्टिक टर्मिनल, एटीसी टावर, तकनीकी ब्लाक, फायर स्टेशन, पार्किंग, एप्रोच रोड और आधुनिक सुरक्षा-आइटी व्यवस्था विकसित की जानी है।

निर्माण के साथ 10 वर्ष के रखरखाव का प्रावधान भी प्रस्ताव में शामिल है। पिछली प्रक्रिया में टेंडर आमंत्रित हो चुके हैं, लेकिन निर्माण की वास्तविक शुरुआत भूमि उपलब्ध होने के बाद ही संभव होगी। यही वजह है कि 18 सितंबर की जनसुनवाई इस परियोजना का सामान्य प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सिंहस्थ की डेडलाइन से जुड़ा अहम पड़ाव है।

सरकार के समक्ष ये चुनौती

सरकार के सामने अक्टूबर तक अधिग्रहण पूरा करने, मुआवजा और भूमि हस्तांतरण कराने के बाद निर्माण एजेंसी को साइट उपलब्ध कराने की चुनौती है। सिंहस्थ के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं, वीआइपी आवागमन, धार्मिक पर्यटन और निवेश के लिहाज से एयरपोर्ट को बड़ी परियोजना माना जा रहा है। लेकिन फिलहाल परियोजना की घड़ी निर्माण स्थल पर नहीं, अधिग्रहण की फाइल पर चल रही है। अब जमीन मिली तो ही रनवे की उड़ान शुरू होगी।

450 यात्रियों की क्षमता, एटीआर-72 से जुड़ेगी हवाई कनेक्टिविटी

प्रस्तावित एयरपोर्ट को करीब 450 यात्रियों की क्षमता के अनुरूप विकसित किया जाना है। मौजूदा दताना-मताना एयरस्ट्रिप की सीमित क्षमता के मुकाबले यह विस्तार उज्जैन को नियमित व्यावसायिक उड़ानों के लिए अधिक सक्षम बनाएगा। परियोजना के लिए पर्यावरणीय मंजूरी भी अहम पड़ाव है।

इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय स्तर पर प्रक्रिया चल रही है। सिंहस्थ को देखते हुए एयरपोर्ट शुरू होने से उज्जैन में धार्मिक पर्यटन के साथ कारोबार, निवेश और वीआईपी आवागमन को भी नई कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।

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