
नईदुनिया प्रतिनिधि उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को उज्जैन के श्री महाकाल लोक अन्नक्षेत्र पार्किंग परिसर से ‘उज्जैन दर्शन’ और ‘पीएम ई-बस सेवा’ की शुरूआत हरी झंडी दिखाकर की। इसके साथ ही उज्जैन में धार्मिक पर्यटन और सार्वजनिक परिवहन को नई दिशा देने की पहल शुरू हुई।
महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आने वाले श्रद्धालु अब 200 रुपये के एक ही टिकट पर शहर के 17 से अधिक प्रमुख मंदिरों और ऐतिहासिक धरोहरों की इलेक्ट्रिक एसी बसों में बैठकर सैर कर सकेंगे। 27 किलोमीटर लंबे रूट पर संचालित इन बसों की सबसे बड़ी सुविधा हॉप-ऑन हॉप-ऑफ है। मतलब- यात्री किसी एक मंदिर पर उतरकर दर्शन कर सकता है और उसी टिकट पर अगली उपलब्ध बस से आगे जा सकता है।
हरी झंडी दिखाने के बाद शक्ति पथ पर मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ स्वयं बस में सफर कर परिवहन व्यवस्था का जायजा लिया। बस संचालन पर निगरानी रखने वाली कंपनी- उज्जैन सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक संदीप सोनी ने बताया कि ‘उज्जैन दर्शन’ बस सेवा की सबसे खास बात यह है कि यात्रियों को हर मंदिर तक पहुंचने के लिए अलग-अलग वाहन की व्यवस्था नहीं करनी होगी।
200 रुपये के टिकट पर यात्री निर्धारित स्टाप पर उतरकर दर्शन कर सकेंगे और फिर उसी टिकट से अगली उपलब्ध बस में बैठकर आगे की यात्रा जारी रख सकेंगे।
इस हॉप-ऑन हॉप-ऑफ व्यवस्था से श्रद्धालुओं को अपनी सुविधानुसार प्रमुख स्थलों पर रुकने का अवसर मिलेगा। टिकट का भुगतान डिजिटल माध्यम और यूपीआई से किया जा सकेगा। बस में यात्रियों को गाइड की सुविधा भी मिलेगी। बसों में जीपीएस आधारित लाइव ट्रैकिंग, सीसीटीवी कैमरे और रियल टाइम मॉनिटरिंग की सुविधा है। डिजिटल असिस्टेंट सह गाइड यात्रियों को प्रमुख मंदिरों और ऐतिहासिक स्थलों के पौराणिक महत्व की जानकारी देगा।
27 किमी के दायरे में इन स्थलों को यात्रा के लिए जोड़ा
27 किलोमीटर लंबे उज्जैन दर्शन मार्ग पर 17 से अधिक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों को जोड़ा गया है। मेघदूत वन पार्किंग से शुरू होने वाली बस महाकाल लोक, हरसिद्धि मंदिर, शिप्रा नदी के घाट, ऋणमुक्तेश्वर महादेव, भर्तृहरि गुफा, गढ़ कालिका माता मंदिर, काल भैरव, सिद्धवट, अंगारेश्वर, मंगलनाथ, सांदीपनि आश्रम, भूखी माता, चिंतामण गणेश, अष्ट विनायक, शनि नवग्रह मंदिर और इस्कान मंदिर होते हुए बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन तक पहुंचेगी। इसके बाद बस वापस मेघदूत वन पार्किंग पर लौटेगी।
शहर में स्थानीय परिवहन को सुगम बनाने के लिए 12 बस मार्ग भी निर्धारित किए गए हैं। इनमें तपोभूमि से पान विहार, रेलवे स्टेशन से कालियादेह महल, कानीपुरा से अभिलाषा कालोनी, देवास गेट से नानाखेड़ा और अवंतिका विश्वविद्यालय से नानाखेड़ा जैसे मार्ग शामिल हैं। इनसे आवासीय, व्यावसायिक, शैक्षणिक और धार्मिक क्षेत्रों के बीच आवागमन आसान बनाने का लक्ष्य है।
सिंहस्थ 2028 में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए यह व्यवस्था निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने और शहर के धार्मिक पर्यटन को व्यवस्थित करने की दिशा में अहम पहल है। हालांकि, इसकी वास्तविक उपयोगिता नियमित संचालन, बसों की उपलब्धता और यात्रियों को समय पर सुविधा मिलने पर निर्भर करेगी।
कार्यक्रम में सांसद अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेश नाथ महाराज, डा. लता वानखेड़े, महापौर मुकेश टटवाल, हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष ओम जैन, सिंहस्थ मेला प्राधिकरण अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, संभागायुक्त आशीष सिंह, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा सहित जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
बस सेवा की पूरी व्यवस्था कई स्तरों पर काम करेगी। राज्य स्तर पर मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमपीवाईपीएल) व्यवस्था देखेगी। इसके तहत उज्जैन संभाग के लिए यूसीटीसीएल काम करेगी। यूसीटीसीएल के एमडी मनीष सिंह और कार्यकारी निदेशक संदीप सोनी हैं।
नगर निगम आयुक्त, लोक निर्माण विभाग सहित संबंधित विभागों के अधिकारी भी व्यवस्था से जुड़े हैं। बसों का प्रत्यक्ष संचालन ग्रीन सेल कंपनी करेगी। ड्राइवर-कंडक्टर उपलब्ध कराने से लेकर बस के मेंटेनेंस तक की जिम्मेदारी ग्रीन सेल की रहेगी। इसके बदले यूसीटीसीएल द्वारा ऑपरेटर को 58 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से भुगतान किया जाएगा।
ये रहेगी संचालन की व्यवस्था
यात्रियों से किराया लेने और फेयर कलेक्शन की जिम्मेदारी ‘चलो’ कंपनी को दी गई है। टिकट से मिलने वाली पूरी आय यूसीटीसीएल के पास जाएगी। ‘चलो’ कंपनी को बस संचालन के हिसाब से 8 रुपये प्रति किलोमीटर के अनुसार भुगतान किया जाएगा।
वहीं पीएम ई-बस योजना के तहत केंद्र से करीब 22 रुपये प्रति किलोमीटर वित्तीय सहायता मिलने का प्रावधान है। इस तरह पूरी व्यवस्था में तीन प्रमुख कड़ियां हैं- यूसीटीसीएल व्यवस्था की नोडल कंपनी, ग्रीन सेल बस ऑपरेटर और ‘चलो’ टिकट फेयर कलेक्शन कंपनी।