• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • उज्जैन

उज्जैन का संवरेगा यातायात... ₹945 करोड़ से बनेगा 5.3 किमी एलिवेटेड कॉरिडोर, महाकाल मंदिर पहुंचना होगा आसान

सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन के यातायात तंत्र को बड़ी सौगात मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को 945 करोड़ 20 लाख रुपये से बनने वाले 5.30 कि...और पढ़ें

By Dheeraj GomeEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Thu, 20 Aug 2026 01:00:03 AM (IST)Updated Date: Thu, 20 Aug 2026 07:29:41 AM (IST)
उज्जैन का संवरेगा यातायात... ₹945 करोड़ से बनेगा 5.3 किमी एलिवेटेड कॉरिडोर, महाकाल मंदिर पहुंचना होगा आसान
उज्जैन का संवरेगा यातायात... ₹945 करोड़ से बनेगा 5.3 किमी एलिवेटेड कॉरिडोर

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन के यातायात तंत्र को बड़ी सौगात मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को 945 करोड़ 20 लाख रुपये से बनने वाले 5.30 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर का भूमिपूजन किया। कालिदास संस्कृत अकादमी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कॉरिडोर नानाखेड़ा बस स्टैंड और गेल क्षेत्र से नीलगंगा, इंदौर गेट और निकास चौराहे होते हुए मक्सी रोड के आगे तक सुगम कनेक्टिविटी देगा।

महाकाल मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह वैकल्पिक मार्ग के रूप में भी उपयोगी होगा। परियोजना का निर्माण उदयपुर की रवि इन्फ्राबिल्ड लिमिटेड करेगी। निर्माण की समय-सीमा 18 महीने रखी गई है। सिंहस्थ से पहले इसे पूरा करने का लक्ष्य है। परियोजना में दो प्रमुख एलिवेटेड कॉरिडोर शामिल हैं। पहला 3.536 किलोमीटर लंबा चार लेन कॉरिडोर चिमनगंज मंडी क्षेत्र से शुरू होकर इंदौर गेट के ऊपर से गुजरते हुए हरिफाटक फ्लाईओवर से जुड़ेगा। दूसरा 1.732 किलोमीटर लंबा दो लेन एलिवेटेड फ्लाईओवर इंदौर गेट से निकास चौराहे तक बनेगा।


दोनों मार्गों की कुल लंबाई करीब 5.30 किलोमीटर होगी। स्थानीय यातायात की सुविधा के लिए चार रैंप और नीचे सर्विस रोड भी विकसित की जाएगी। इससे एलिवेटेड मार्ग पर लंबी दूरी के वाहनों को तेज और निर्बाध रास्ता मिलेगा, जबकि स्थानीय वाहनों की आवाजाही नीचे की सड़क से जारी रहेगी।

भूमि पूजन के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि एलिवेटेड कॉरिडोर नानाखेड़ा और गेल क्षेत्र से नीलगंगा, इंदौर गेट, निकास चौराहा होते हुए मक्सी रोड और मंडी क्षेत्र तक सीधी कनेक्टिविटी देगा। महाकाल जाने वाले श्रद्धालुओं को इससे वैकल्पिक रास्ता मिलेगा। उन्होंने कहा कि शहर का विकास केवल एक दिशा में नहीं, बल्कि गुब्बारे की तरह चारों दिशाओं में होना चाहिए। पुराने शहर में भीड़ और देवस्थलों तक सुगम आवागमन को ध्यान में रखकर विकास की योजना बनाने की जरूरत है।

इंदौर गेट पर बनेगा सबसे बड़ा एलिवेटेड जंक्शन

परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इंदौर गेट पर बनने वाला एलिवेटेड जंक्शन होगा। यह करीब 10 मीटर ऊंचा और 40 मीटर चौड़ा होगा। यहां आगर रोड, चिमनगंज मंडी, इंदौर गेट और निकास चौराहे की दिशा से आने वाले यातायात को एलिवेटेड नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। शहर के इस अत्यधिक व्यस्त हिस्से में वाहनों को चौराहे और सिग्नल के दबाव से राहत मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन में विकास को केवल एक दिशा में नहीं, बल्कि चारों दिशाओं में समान रूप से आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने पुराने शहर में भीड़ प्रबंधन और देवस्थानों तक सुगम आवागमन को विकास योजनाओं के केंद्र में रखने की बात कही। उनके मुताबिक एलिवेटेड कॉरिडोर के साथ रेलवे ओवरब्रिज, अंडरब्रिज और बायपास जैसी संरचनाओं को जोड़कर शहर का व्यापक ट्रैफिक नेटवर्क तैयार किया जा रहा है।

महाकाल मंदिर, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड तक मिलेगी सीधी कनेक्टिविटी

कॉरिडोर बनने के बाद नीलगंगा, इंदौर गेट और निकास चौराहा क्षेत्र का यातायात अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, फ्रीगंज, आगर रोड और महाकाल क्षेत्र की ओर जाने वाले यातायात को वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में आने वाले वाहनों और श्रद्धालुओं के दबाव को देखते हुए यह कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

परियोजना को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर भी तैयार किया जा रहा है। एलिवेटेड मार्ग के पिलर और फाउंडेशन को मजबूत बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में परिवहन व्यवस्था के विस्तार के लिए इनका उपयोग किया जा सके।

पहले 416 करोड़ की परियोजना, अब बढ़कर हुई 945 करोड़

चार दिन पहले तक परियोजना को 416 करोड़ रुपये की लागत वाली दो एलिवेटेड फ्लाईओवर परियोजनाओं के रूप में बताया गया था और इंदौर गेट-निकास चौराहा हिस्से में मिट्टी परीक्षण शुरू हो चुका था। भूमिपूजन के दौरान सामने आई विस्तृत परियोजना में अब कुल लागत 945.20 करोड़ रुपये और कुल लंबाई 5.30 किलोमीटर बताई गई है। इससे परियोजना का दायरा और कनेक्टिविटी पहले के अनुमान से व्यापक हो गई है।

परियोजना से क्या बदलेगा: पुराने शहर में यातायात दबाव होगा कम

इंदौर गेट-चिमनगंज मंडी क्षेत्र में लंबे समय से जाम का दबाव है। एलिवेटेड मार्ग से लंबी दूरी का यातायात ऊपर शिफ्ट होने पर नीचे की सड़क स्थानीय यातायात के लिए अधिक उपयोगी हो सकेगी। महाकाल क्षेत्र, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड की ओर जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक कनेक्टिविटी मिलेगी। सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं के वाहनों को शहर के व्यस्त चौराहों से निकालने में भी मदद मिलेगी। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि शहर के पुराने और भीड़भाड़ वाले हिस्से में यातायात को कई स्तरों पर संचालित किया जा सकेगा।

CM ने होमगार्ड और वालंटियर्स प्रशिक्षण का किया शुभारंभ

भूमिपूजन कार्यक्रम के साथ मुख्यमंत्री ने होमगार्ड, आपदा मित्र एवं सिविल डिफेंस वालंटियर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने आपदा प्रबंधन उपकरणों और बचाव संसाधनों का अवलोकन किया। बाढ़, आगजनी, भवन दुर्घटना, सड़क हादसे जैसी आपात परिस्थितियों में इन उपकरणों का उपयोग होगा। मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ-2028 को देखते हुए प्रशिक्षित मानव संसाधन को भी जरूरी बताया।

यह भी पढ़ें- मैहर का होगा कायाकल्प... ₹256 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात, CM ने रखी 'मां शारदा लोक' की आधारशिला