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उज्जैन में कालभैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर और सांदीपनि आश्रम अब श्रद्धालुओं को नए रूप में आएंगे नजर

Ujjain News: सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन के 3 बड़े धार्मिक केंद्र नए रूप में तैयार होंगे। कालभैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर और सांदीपनि आश्रम के विकास पर 4...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Thu, 06 Aug 2026 11:22:53 AM (IST)Updated Date: Thu, 06 Aug 2026 11:35:28 AM (IST)
उज्जैन में कालभैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर और सांदीपनि आश्रम अब श्रद्धालुओं को नए रूप में आएंगे नजर
उज्जैन के प्रमुख तीन मंदिरों का बदलेगा स्वरूप। - फाइल फोटो

HighLights

  1. योजना का फोकस सिर्फ मंदिर नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं का पूरा अनुभव है
  2. पार्किंग, वेटिंग हॉल, प्रसादी-दुकानें और सुविधाओं के साथ दर्शन को व्यवस्थित बनाया जाएगा
  3. कालभैरव परिसर के विकास पर 164.50 करोड़ रुपये खर्च होंगे

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। उज्जैन में आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा के तीन अलग-अलग रूप हैं। कालभैरव में आस्था का रौद्र स्वरूप, मंगलनाथ में पूजा-अनुष्ठान की परंपरा और सांदीपनि आश्रम में गुरु-शिष्य संबंध की गौरवशाली कथा। सिंहस्थ-2028 से पहले इन तीनों केंद्रों को इसी विशिष्ट पहचान के अनुरूप नया स्वरूप देने की तैयारी है। खास बात यह है कि विकास का केंद्र केवल मंदिर नहीं, मंदिर तक पहुंचने वाले श्रद्धालु का पूरा अनुभव है।

उज्जैन के ये तीन केंद्र अब केवल दर्शन के पड़ाव नहीं होंगे

कालभैरव में आस्था, मंगलनाथ में साधना और सांदीपनि में ज्ञान की अपनी-अपनी कथा को नए परिसर में महसूस करने का अवसर मिलेगा। तीनों परियोजनाओं पर 453 करोड़ 41 लाख रुपये खर्च होंगे। योजनाओं में मंदिरों के जीर्णोद्धार, संरक्षण और सौंदर्यीकरण के साथ वेटिंग एरिया, फैसिलिटी सेंटर, पार्किंग, प्रसादी व खान-पान की दुकानें और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को भी जगह दी गई है। यानी सिंहस्थ में उमड़ने वाली भीड़ के बीच दर्शन की राह अधिक व्यवस्थित और परिसर अधिक सुविधाजनक बनाने की कोशिश है।


कालभैरव : आस्था के साथ पार्किंग की सबसे बड़ी व्यवस्था

भगवान कालभैरव के मंदिर परिसर के विकास पर 164.50 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 14.55 हेक्टेयर में होने वाले विकास में करीब 8700 वर्गमीटर का मंदिर कांप्लेक्स प्रस्तावित है। श्रद्धालुओं के लिए 8480 वर्गमीटर का सर्वसुविधायुक्त फैसिलिटी सेंटर व वेटिंग हाल बनाया जाएगा। परियोजना में भगवान कालभैरव की प्रतिमा के लिए 6810 वर्गमीटर क्षेत्र और फूल-प्रसादी व खान-पान की दुकानों के लिए 6930 वर्गमीटर का प्रावधान है।

सिंहस्थ में सबसे बड़ा दबाव वाहनों का होता है। इसे देखते हुए यहां 27300 वर्गमीटर सरफेस पार्किंग और 8670 वर्गमीटर मल्टीलेवल पार्किंग विकसित की जाएगी। प्रशासनिक ब्लाक भी बनाया जाएगा। इस तरह मंदिर के आसपास वाहन, श्रद्धालु और दुकानों की आवाजाही को अलग-अलग स्तर पर व्यवस्थित करने की कोशिश है।

मंगलनाथ मंदिर : पूजा के लिए भी जगह, प्रतीक्षा के लिए भी

मंगलनाथ मंदिर के विकास पर 123.90 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 4.74 हेक्टेयर क्षेत्र में होने वाली परियोजना में मंदिर रोड का चौड़ीकरण, मंदिर जीर्णोद्धार, संरक्षण और सौंदर्यीकरण शामिल है। मुख्य मंदिर, माता पूजा हाल और हवन कुंड सहित 5150 वर्गमीटर का मंदिर कांप्लेक्स विकसित होगा। श्रद्धालुओं के लिए 2272 वर्गमीटर का सर्वसुविधायुक्त फैसिलिटी सेंटर व वेटिंग हाल बनाया जाएगा। फूल-प्रसादी व खान-पान की दुकानों के लिए 568 वर्गमीटर जगह रहेगी। प्रशासनिक ब्लाक और सरफेस पार्किंग भी प्रस्तावित है।

सांदीपनि आश्रम : जहां परिसर सुनाएगा कृष्ण की शिक्षा की कहानी

महर्षि सांदीपनि आश्रम के विकास पर 165.01 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 6.58 हेक्टेयर क्षेत्र में आश्रम का जीर्णोद्धार, संरक्षण और सौंदर्यीकरण किया जाएगा। करीब 33800 वर्गमीटर में आश्रम एवं मंदिर परिसर का विकास प्रस्तावित है। यहां विकास का केंद्र केवल भवन नहीं, भारतीय गुरुकुल परंपरा का अनुभव होगा।

परियोजना में भारतीय गुरुकुल शिक्षा पद्धति को आधुनिक तकनीक, वर्चुअल इंटरैक्शन, इंटरैक्टिव प्रदर्शन और सांस्कृतिक पुनर्स्थापन के माध्यम से प्रस्तुत करने की योजना है। परिसर में प्रवेश गलियारा, प्रवचन स्थल, श्रद्धालु सुविधाएं और भगवान श्रीकृष्ण की 64 कलाओं की जानकारी देने वाला संग्रहालय प्रस्तावित है। आश्रम क्षेत्र, मंदिर परिसर और ज्ञान पथ भी विकसित किए जाएंगे। कुंड के संरक्षण का भी प्रावधान है।

सिंहस्थ में सिर्फ भीड़ नहीं, व्यवस्थित आध्यात्मिक यात्रा

तीनों परियोजनाओं को साथ रखकर देखें तो तस्वीर साफ है। कालभैरव में वाहन और भीड़ प्रबंधन, मंगलनाथ में पूजा-अनुष्ठान के अनुरूप सुविधा और सांदीपनि आश्रम में ज्ञान एवं गुरु परंपरा का अनुभव- तीनों की अपनी अलग भूमिका होगी। सिंहस्थ में जब लाखों श्रद्धालु इन स्थलों की ओर आएंगे, तब चुनौती केवल उन्हें मंदिर तक पहुंचाने की नहीं होगी।

चुनौती होगी कि श्रद्धालु की यात्रा भीड़ से शुरू होकर अव्यवस्था में खत्म न हो, बल्कि दर्शन, सुविधा और आध्यात्मिक अनुभूति के साथ पूरी हो। यही वजह है कि इन योजनाओं में मंदिर के साथ पूरा परिसर विकसित करने पर जोर दिया गया है।

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