
अमित अतलसिया, नईदुनिया, उज्जैन : सिंहस्थ 2028 में करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए रेलवे उज्जैन और आसपास के स्टेशनों का कायाकल्प करने की तैयारी में है। यात्री सुविधाओं के विस्तार से लेकर भीड़ प्रबंधन और ट्रेनों के संचालन तक, रेलवे का पूरा जोर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर है।
इसके लिए उज्जैन सहित आसपास के छह स्टेशनों पर 580 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा उज्जैन स्टेशन को मिलेगा। यहां 281.67 करोड़ रुपये की लागत से 17 कार्य किए जाएंगे। स्टेशन पर तीन नए फुट ओवरब्रिज, चार होल्डिंग बिल्डिंग, अतिरिक्त यात्री प्रतीक्षास्थल और स्टेबलिंग लाइनें विकसित की जाएंगी। सिंहस्थ के दौरान एक साथ उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित करने में ये सुविधाएं अहम भूमिका निभाएंगी।
उज्जैन स्टेशन पर प्लेटफार्म नंबर एक से आठ के बीच यात्रियों की आवाजाही सुगम बनाने के लिए तीन नए फुट ओवरब्रिज (एफओबी) बनाए जाएंगे। इनमें बीच में बनने वाला 12 मीटर चौड़ा फुट ओवरब्रिज सबसे अहम है। इस पर 35.68 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें शेड, रैंप और लिफ्ट की सुविधा भी रहेगी, ताकि बुजुर्गों, दिव्यांगों और भारी सामान के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों को परेशानी न हो।
इसके अलावा भोपाल और रतलाम छोर पर छह-छह मीटर चौड़े दो फुट ओवरब्रिज बनाए जाएंगे। प्रत्येक पर 18.41 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। तीनों फुट ओवरब्रिज बनने से प्लेटफार्मों के बीच यात्रियों का दबाव कम करने और भीड़ को अलग-अलग रास्तों से निकालने में मदद मिलेगी।
सिंहस्थ के दौरान स्टेशन पर अचानक बढ़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए चार नई जी प्लस-2 होल्डिंग बिल्डिंग बनाई जाएंगी। प्लेटफार्म नंबर एक पर रनिंग रूम के पास एक और प्लेटफार्म नंबर आठ पर तीन बिल्डिंग प्रस्तावित हैं। प्रत्येक भवन पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके अतिरिक्त यात्रियों के लिए होल्डिंग एरिया विकसित करने पर 20.29 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य यह है कि ट्रेनों के आने-जाने के समय यात्रियों की भीड़ सीधे प्लेटफार्मों पर जमा न हो और जरूरत पड़ने पर उन्हें निर्धारित स्थानों पर रोका जा सके।
स्टेशन पर यात्री सुविधाओं के साथ ट्रेनों के संचालन की क्षमता बढ़ाने के लिए भी काम किए जाएंगे। लोको यार्ड और एनसी यार्ड में स्टेबलिंग लाइन विकसित करने पर 54.71 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे ट्रेनों को खड़ा करने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था उपलब्ध होगी। सर्कुलेटिंग एरिया और ड्रेनेज व्यवस्था सुधारने के लिए 19.79 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
स्टेशन और आसपास के क्षेत्र में बिजली आपूर्ति मजबूत करने के लिए 33 केवी का नया सब स्टेशन बनाया जा रहा है। इलेक्ट्रिकल अपग्रेडेशन पर आठ करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सुरक्षा और रेलवे कर्मचारियों की जरूरतों को देखते हुए 20 बिस्तरों वाली बैरक के निर्माण पर 8.75 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा सब डिविजनल रेलवे अस्पताल और 20 कमरों का रेस्ट हाउस भी प्रस्तावित है।
सिंहस्थ की तैयारियों के तहत उज्जैन-पिंगलेश्वर रेलखंड के बीच पंवासा में नया बी-क्लास स्टेशन बनाया जा रहा है। इस पर 49.85 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यहां करीब 41 करोड़ रुपये की लागत से हाई लेवल प्लेटफार्म, फुट ओवरब्रिज, अस्थायी शौचालय और पेयजल व्यवस्था विकसित की जाएगी।
नईखेड़ी स्टेशन पर 67.27 करोड़ रुपये की लागत से यार्ड का नवीनीकरण, अतिरिक्त लूप लाइन, स्टेबलिंग लाइन और फुट ओवरब्रिज के काम प्रस्तावित हैं। चिंतामन गणेश स्टेशन पर 49.63 करोड़ रुपये खर्च कर अतिरिक्त लूप लाइन, प्लेटफार्मों पर शेड, छह मीटर चौड़ा फुट ओवरब्रिज और अस्थायी होल्डिंग एरिया विकसित करने की योजना है।
फतेहाबाद स्टेशन पर 22.64 करोड़ रुपये की लागत से यात्री सुविधाओं और भीड़ नियंत्रण से जुड़े काम किए जाएंगे। यहां फुट ओवरब्रिज और 10 बिस्तरों वाली बैरक भी प्रस्तावित है। मोहनपुरा स्टेशन पर 29.29 करोड़ रुपये खर्च कर दो फुट ओवरब्रिज और छत व शेड सहित उच्च स्तरीय प्लेटफार्म बनाया जाएगा।
सिंहस्थ के दौरान उज्जैन पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का दबाव केवल मुख्य स्टेशन तक सीमित नहीं रहेगा। ऐसे में आसपास के स्टेशनों पर सुविधाओं का विस्तार यात्रियों को अलग-अलग मार्गों और स्टेशनों के माध्यम से संभालने में मददगार होगा। रेलवे की इन योजनाओं का असर सिंहस्थ के दौरान यात्रियों की आवाजाही, ट्रेनों के संचालन और स्टेशन पर भीड़ प्रबंधन पर दिखाई देने की उम्मीद है।