
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को उज्जैन में 539 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। सबसे अहम काम अंकपात चौराहे से खाकचौक होते हुए मंगलनाथ तक मार्ग चौड़ीकरण का है, जिस पर 98.24 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
शिप्रा के पूर्वी किनारे पर 6.1 किलोमीटर लंबी नई सड़क बनेगी। शहर में पाचंजन्य और अमृत द्वार भी आकार लेंगे। कहा गया है कि सिंहस्थ में भीड़ सड़कों पर उतरेगी, तो रास्ते ही उज्जैन की सबसे बड़ी परीक्षा होंगे। इसी चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने शहर के रास्तों से लेकर मंदिरों के प्रवेश तक बदलाव की तैयारी की है।
सवाल अब यही है कि सिंहस्थ से पहले ये परियोजनाएं कितनी तेजी से पूरी होती हैं और श्रद्धालुओं को जाम से कितनी राहत मिलती है। फिलहाल भूमि पूजन समारोह में मुख्यमंत्री ने उज्जैन के बदलते भूगोल और मध्यप्रदेश सरकार की योजनाओं की जानकारी साझा की।
कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, राज्यसभा सदस्य उमेशनाथ महाराज, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. रवि सोलंकी, हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन ओम जैन सहित गणमान्यजन मंचासीन थे। भूमि पूजन से पहले मुख्यमंत्री ने वाल्मीकि धाम पहुंच महर्षि वाल्मीकि की तस्वीर के समक्ष प्रणाम किया और पूजन कर विश्व कल्याण की कामना की।
अंकपात चौराहे से खाकचौक होते हुए मंगलनाथ तक मार्ग चौड़ीकरण पर 98.24 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सिंहस्थ के दौरान मंगलनाथ क्षेत्र में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने के मद्देनजर यह मार्ग महत्वपूर्ण है। कुशाभाऊ ठाकरे मार्ग से छोटी रपट तक सड़क चौड़ीकरण पर भी 36.75 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
शिप्रा नदी के पूर्वी हिस्से में 6.1 किलोमीटर लंबी और नौ मीटर चौड़ी सड़क 82.20 करोड़ रुपये से बनाई जाएगी। इसका उद्देश्य आवागमन के लिए अतिरिक्त मार्ग उपलब्ध कराना है, ताकि सिंहस्थ के दौरान प्रमुख सड़कों पर यातायात का दबाव कम करने में मदद मिले।
शहर की प्रवेश व्यवस्था को नया स्वरूप देने के लिए 21.65 करोड़ रुपये से पांचजन्य द्वार और 19.50 करोड़ रुपये से अमृत द्वार बनाया जाएगा। दोनों पर कुल 41.15 करोड़ रुपये खर्च होंगे। अमृत द्वार की प्रस्तावित चौड़ाई 120 फीट और ऊंचाई 44 फीट होगी।
भूखी माता मंदिर परिसर और आसपास की अधोसंरचना का विकास किया जाएगा। सिद्धवट मंदिर परिसर में 14.58 करोड़ रुपये से कतार क्षेत्र, निकास व्यवस्था, प्रशासनिक भवन, शौचालय और चेंजिंग रूम जैसी सुविधाएं विकसित होंगी।