
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : ‘पढ़ने-लिखने की कोई उम्र नहीं होती’- यह कहावत शनिवार को उज्जैन जिले में आयोजित ‘उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ के दौरान चरितार्थ होती दिखाई दी। ग्रामीण अंचलों में घूंघट की मर्यादा और परंपराओं के बीच जब महिलाओं के हाथों में कलम आई, तो साक्षरता का एक नया सवेरा देखने को मिला। कहीं बहू अपनी सास की परीक्षा ले रही थी, तो कहीं बुजुर्ग परीक्षार्थियों का तिलक लगाकर स्वागत किया जा रहा था।
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय (स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग) की अतिरिक्त सचिव अर्चना शर्मा अवस्थी ने शनिवार को जिले के शासकीय माध्यमिक विद्यालय पालखंदा एवं शासकीय माध्यमिक विद्यालय नरवर स्थित परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण किया।
केंद्रों पर नवसाक्षरों के अभूतपूर्व उत्साह को देखकर उन्होंने व्यवस्थाओं की सराहना की और परीक्षार्थियों से सीधे संवाद कर उनका हौसला बढ़ाया। निरीक्षण के दौरान ग्रामीण केंद्र पर एक बेहद भावुक और प्रेरक दृश्य देखने को मिला, जहां सामाजिक सहभागिता की अनूठी मिसाल कायम हुई। एक गांव में बहू ने ''अक्षर साथी'' (प्रेरक) के रूप में अपनी ही सास की नवसाक्षर मूल्यांकन परीक्षा ली।
घूंघट में बैठी ग्रामीण महिलाओं के हाथों में जब कापियां और पेन दिखे, तो यह संदेश साफ हो गया कि शिक्षा की राह में उम्र या सामाजिक बंदिशें आड़े नहीं आ सकतीं। सामाजिक चेतना केंद्रों पर जब 15 वर्ष से लेकर बुजुर्ग आयु वर्ग के परीक्षार्थी पहुंचे, तो उनका पारंपरिक रूप से तिलक लगाकर स्वागत किया गया।
केंद्रों पर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच परीक्षार्थियों ने अपनी सुविधा अनुसार एक घंटे की लिखित परीक्षा दी। जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी संजय शर्मा ने बताया कि जिले में निर्धारित लक्ष्य के अनुसार शांतिपूर्ण व सुचारू परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा के तुरंत बाद उत्तरपुस्तिकाओं की जांच का कार्य शुरू कर दिया गया है।
मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी होते ही परिणाम को अधिकृत पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा। निरीक्षण के दौरान राज्य शिक्षा केंद्र के अपर संचालक अरूण सिंह एवं राज्य साक्षरता नियंत्रक डा. राकेश दुबे सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
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