
संजय कुमार शर्मा, नईदुनिया, उमरिया। जिले के छोटे से गांव लोढ़ा में आकार लेने वाली बैगा जनजाति की पारंपरिक चित्रकला अब सात समंदर पार ग्रीस में अपनी पहचान बनाने की तैयारी में है।
जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति से जुड़ी इस विशिष्ट लोककला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाने की पहल शुरू हो गई है। ग्रीस की राजधानी एथेंस से उमरिया पहुंचीं दो महिला चित्रकारों ने बैगा चित्रकला को करीब से देखा और इसकी विशेषताओं को समझा।
इस बारे में जानकारी देते हुए जनगण तस्वीरखान के संचालक निमिष स्वामी ने बताया कि लोढ़ा आने वाली विदेशी चित्रकारों में हारा पापड़ोपोलो और मारिया ग्रेगोरियो शामिल हैं। दोनों ही चियरकारों के द्वारा अब ग्रीस में बैगा चित्रों की प्रदर्शनी आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है। इस पहल से जिले की जनजातीय विरासत को वैश्विक पहचान मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
दरअसल, दिल्ली की ओजस आर्ट गैलरी में बैगा चित्रकार झूलन बाई बैगा के चित्रों की प्रदर्शनी लगी हुई है। इस प्रदर्शनी को देखने पहुंचीं ग्रीस की दो महिला कलाकार बैगा चित्रकला की शैली और उसकी सांस्कृतिक विशिष्टता से काफी प्रभावित हुईं।
चित्रों के माध्यम से जनजातीय जीवन और परंपराओं की अभिव्यक्ति ने उनका ध्यान आकर्षित किया। जब उन्हें पता चला कि उमरिया जिले का लोढ़ा गांव बैगा चित्रकला का प्रमुख केंद्र है, तो उन्होंने यहां पहुंचकर इस कला को प्रत्यक्ष रूप से देखने का निर्णय लिया।
उमरिया पहुंचने के बाद दोनों विदेशी कलाकार लोढ़ा गांव गईं। यहां उन्होंने बैगा चित्रकारों से मुलाकात कर उनकी पारंपरिक चित्रकारी का अवलोकन किया। चित्रों को बनाने की शैली, उनमें उकेरे जाने वाले विषयों और इस कला से जुड़े सांस्कृतिक महत्व को समझने का प्रयास किया।
गांव में कलाकारों के काम को करीब से देखने के बाद उन्होंने बैगा चित्रकला को ग्रीस में प्रदर्शित करने की इच्छा जताई। इस दौरान प्रस्तावित प्रदर्शनी के लिए कई चित्रों का चयन भी किया गया। यदि योजना के अनुसार प्रदर्शनी आयोजित होती है, तो उमरिया के बैगा चित्रकारों की रचनाएं यूरोप के कला प्रेमियों तक पहुंच सकेंगी।
बैगा चित्रकला केवल रंगों और आकृतियों का संयोजन नहीं है, बल्कि यह जनजातीय समाज की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक जीवन दृष्टि को भी अभिव्यक्त करती है। ऐसी लोककलाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच मिलने से इनके संरक्षण और संवर्धन के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और व्यापक पहचान बनाने का अवसर मिलेगा। दिल्ली की आर्ट गैलरी से शुरू हुआ आकर्षण अब ग्रीस तक पहुंचने की संभावना में बदल रहा है। लोढ़ा गांव के कलाकारों की मेहनत और पारंपरिक कला के प्रति विदेशी कलाकारों की रुचि ने उमरिया की सांस्कृतिक विरासत के लिए नई उम्मीद जगाई है।
अब निगाहें ग्रीस में प्रस्तावित प्रदर्शनी की तैयारियों पर टिकी हैं, जहां बैगा चित्रकला अपने रंगों के जरिए भारत की जनजातीय संस्कृति की कहानी दुनिया के सामने रख सकती है।