
नईदुनिया प्रतिनिधि, उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में नए पर्यटन सत्र से पुराने सफारी वाहनों को लेकर नियमों का कड़ाई से पालन किया जाएगा। वर्ष 2012 तक निर्मित बीएस-2 और बीएस-3 श्रेणी की जिप्सियों का संचालन निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद नहीं किया जा सकेगा।
टाइगर रिजर्व में अब बीएस-4 और बीएस-6 मानक वाले वाहनों को ही सफारी के लिए प्राथमिकता दी जाएगी। यह व्यवस्था नई नहीं है। इस संबंध में 5 सितंबर 2019 को आदेश जारी किया गया था, लेकिन अब इस पर सख्ती से अमल करने के निर्देश पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ स्तर से दिए गए हैं।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वर्तमान में करीब 252 जिप्सियां पंजीकृत हैं। इनमें 46 जिप्सियां बीएस-2 श्रेणी की बताई जा रही हैं। पार्क प्रबंधन ने संबंधित जिप्सी मालिकों को पुराने वाहनों को बदलने के निर्देश जारी किए हैं।
वाहन संचालकों के लिए यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बांधवगढ़ के कोर और बफर क्षेत्र में सफारी के दौरान जिप्सियों को कच्चे और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरना पड़ता है। कई पर्यटन मार्ग पहाड़ी क्षेत्रों से होकर भी गुजरते हैं। ऐसे में वाहन की तकनीकी स्थिति और निर्धारित मानकों का पालन सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. अनुपम सहाय ने बताया कि जिन बीएस-2 और बीएस-3 जिप्सियों का पंजीयन 15 वर्ष की अवधि पूरी कर चुका है, उन्हें संचालन से बाहर किया जाएगा। वाहन संचालक इस प्रक्रिया से पहले से परिचित हैं और नए वाहनों की तैयारी कर रहे हैं।
नए वाहन उपलब्ध होने पर नियमानुसार उनका पंजीयन किया जाएगा। नए पर्यटन सत्र में पुराने वाहनों के स्थान पर निर्धारित मानकों वाले वाहनों के संचालन से सफारी व्यवस्था में भी बदलाव दिखाई देगा।
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