
नईदुनिया प्रतिनिधि, उमरिया। उमरिया के पर्यटन क्षेत्र में ऑनलाइन सफारी बुकिंग से जुड़ी एक ऐसी व्यवस्था पर बदलाव की संभावना बन रही है, जिसका असर सीधे पर्यटकों, जिप्सी संचालकों और गाइडों पर पड़ता है।
दरअसल, कई पर्यटक एक ही दिन और एक ही समय के लिए अलग-अलग गेटों की ऑनलाइन बुकिंग कर लेते हैं। इनमें से किसी एक टिकट का इस्तेमाल होने के बाद बाकी टिकट बेकार हो जाते हैं और उन्हें दूसरे पर्यटकों को देने की व्यवस्था नहीं है।
टिकट की राशि वन विभाग को मिलने से विभाग को आर्थिक नुकसान नहीं होता, लेकिन बुक किए गए और इस्तेमाल न हुए टिकटों के कारण जिप्सियों की संख्या घटती है। इससे जिप्सी संचालक-चालक और गाइड प्रभावित होते हैं, वहीं टिकट की कमी के चलते दूसरे पर्यटक भी सफारी से वंचित रह जाते हैं।
एक ही दिन और समय की अलग-अलग गेटों पर आनलाइन बुकिंग करने वाले पर्यटक बढ़ा रहे टिकटों की बर्बादी।इस्तेमाल न होने वाले टिकट किसी दूसरे पर्यटक को देने की मौजूदा व्यवस्था नहीं।
टिकट की राशि वन विभाग को मिलती रहती है, लेकिन जिप्सी और गाइड को नुकसान होता है। बचे टिकट जरूरतमंद पर्यटकों को देने के प्रस्ताव पर मध्य प्रदेश के वन अधिकारी कर रहे विचार। निर्णय हुआ तो विभाग, पर्यटक, जिप्सी संचालक-चालक और गाइड सभी को लाभ की संभावना।
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