
नईदुनिया प्रतिनिधि, उमरिया। यात्री ट्रेनों को रोककर मालगाड़ियों को प्राथमिकता देने की रेलवे की कार्यप्रणाली अब यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बनती नजर आ रही है। मंगलवार शाम बंधवाबारा रेलवे स्टेशन पर ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां ट्रेनों के संचालन को लेकर यात्रियों में असमंजस की स्थिति बन गई। इस दौरान प्लेटफार्म नंबर दो से प्लेटफार्म नंबर एक के बीच भगदड़ जैसी स्थिति निर्मित हो गई। इसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।
मंगलवार शाम मदनमहल-अंबिकापुर एक्सप्रेस को बंधवाबारा स्टेशन पर रोककर मालगाड़ी को आगे निकाला गया। इसके बाद यात्रियों को उम्मीद थी कि पीछे से आ रही चंदिया-चिरमिरी पैसेंजर ट्रेन को पहले रवाना किया जाएगा। क्योंकि इस स्टेशन पर पहले भी ऐसा किया जा चुका है।
मदनमहल-अंबिकापुर एक्सप्रेस में बैठे यात्रियों के बीच भी इसी बात की चर्चा होने लगी। इसके चलते कई यात्री ट्रेन से नीचे उतर गए और चंदिया-चिरमिरी पैसेंजर के आने पर उसमें सवार होने लगे। वहीं कुछ यात्री इस आशंका में प्लेटफॉर्म पर ही खड़े रहे कि कहीं मदनमहल-अंबिकापुर एक्सप्रेस को ही पहले रवाना न कर दिया जाए।
इसी असमंजस के बीच चंदिया-चिरमिरी पैसेंजर ट्रेन को सिग्नल मिल गया। इसके बाद प्लेटफार्म नंबर दो से एक के बीच यात्रियों में जल्दबाजी शुरू हो गई। दोनों प्लेटफार्म के बीच आवाजाही के दौरान भगदड़ जैसे हालात बन गए। इस अफरा-तफरी में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। गनीमत रही कि कोई बड़ी दुर्घटना होने की जानकारी सामने नहीं आई। रेलवे की इस अव्यवस्थित कार्यप्रणाली ने छोटे स्टेशनों पर यात्री सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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यात्रियों का कहना है कि मालगाड़ियों को निकालने के लिए यात्री ट्रेनों को रोकने से पहले यात्रियों को स्पष्ट जानकारी और सुरक्षित व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए। बंधवाबारा जैसे छोटे स्टेशन पर यदि इसी तरह अफरा-तफरी की स्थिति बनती रही तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। रेलवे अधिकारियों को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ट्रेन संचालन और यात्रियों की सुरक्षा की समीक्षा करनी चाहिए।