
संजय कुमार शर्मा, उमरिया। जंगल में संकट से घिर जाने वाले वन्य प्राणियों को तुरंत सहायता मिल सके इसके लिए सरकार ने प्रदेश के सभी संभाग में रेस्क्यू सेंटर शुरू करने की योजना पर काम करना शुरू कर दिया है। इसके लिए कार्ययोजना बनाने की जिम्मेदारी भी मुख्य सचिव वीरा राणा, अपर मुख्य सचिव वन जे.एन. कंसोटिया को सौंपी गई है।
वन विभाग वाइल्ड लाइफ के अधिकारियों के सहयोग से इस पर कार्य योजना तैयार की जाएगी। वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार का कहना है कि प्रदेश के सभी संभागों में वन्य प्राणियों के लिए रेस्क्यू सेंटर की स्थापना से उनके जीवन की रक्षा का काम बेहतर ढंग से हो सकेगा।
संभावित कार्ययोजना के अनुसार संभाग स्तर पर रेस्क्यू सेंटर की स्थापना से वन विभाग के कर्मचारियों को रेस्क्यू का बेहतर प्रशिक्षण मिल सकेगा और वे वन्य जीवों के जीवन की सुरक्षा के लिए बेहतर ढंग से काम करने में सक्षम हो सकेंगे। रेस्क्यू सेंटर स्थापित हो जाने से स्थानीय स्तर पर ही संभाग के सभी जिलों के वन कर्मचारियों को नई तकनीक की समय पर जानकारी भी मिल सकेगी और उन्हें काम करने में सुविधा होगी।
कार्ययोजना में इस बात का भी ख्याल रखा जाएगा कि संभाग स्तर पर सेंटर की स्थापना के बाद रेस्क्यू के लिए संभाग स्तर पर दल भी हमेशा तैयार रहे। इससे आवश्यकता पड़ने पर यह दल अपने क्षेत्र में कहीं भी कुछ ही समय में पहुंच जाएगा और आवश्यक सहायता उपलब्ध करा सकेगा। इतना ही नहीं संभागीय रेस्क्यू सेंटर से प्रशिक्षण प्राप्त वन कर्मचारी सभी जगह मौजूद रहेंगे जिसका लाभ भी आवश्यकता पड़ने पर मिल सकेगा।
मध्य प्रदेश राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की 26वीं बैठक में संभागीय रेस्क्यू सेंटर की स्थापना पर जोर देते हुए इस बात की भी चर्चा की गई कि जंगल से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर बाघ और दूसरे हिंसक वन्य प्राणी प्रवेश कर जाते हैं जिससे ग्रामीणों का जीवन संकट में पड़ जाता है। ऐसे मौके पर संभागीय स्तर पर स्थापित होने वाले रेस्क्यू सेंटर की मदद से ग्रामीणों के जीवन की रक्षा बेहतर ढंग से की जा सकती है।
संभागीय स्तर पर रेस्क्यू सेंटर इसलिए आवश्यक है क्योंकि जंगल अथवा जंगल से लगे गांव में वन्य प्राणियों द्वारा की जाने वाली घटना को रोकना आवश्यक होता है। जंगल में आपसी लड़ाई में कई बार जानवर घायल हो जाते हैं जिनके उपचार के लिए रेस्क्यू दल की आवश्यता होती है। जंगल में लगी आग से घिर जाने वाले वन्य प्राणियों की जीवन रक्षा की जिम्मेदारी रेस्क्यू दल ही निभा सकता है। किसी वन्य प्राणी के गांव में घुस जाने पर लोगों की रक्षा भी रेस्क्यू दल उस वन्य प्राणी को वापस जंगल के अंदर पहुंचाकर कर सकता है।