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बांधवगढ़ से कान्हा, पेंच, पन्ना और सतपुड़ा तक वन्यजीव बचाव केंद्रों की तैयारी, सिर्फ रेस्क्यू सेंटर होगा

मध्य प्रदेश सरकार की मंशा है कि सभी टाइगर रिजर्व में रेस्क्यू सेंटर हो ताकि बीमार और घायल होने वाले वन्यजीवों के साथ बूढ़े और कमजोर वन्यप्राणियों को भ...और पढ़ें

By SanjayKumar SharmaEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Tue, 20 Oct 2026 08:36:13 PM (IST)Updated Date: Tue, 20 Oct 2026 08:36:13 PM (IST)
बांधवगढ़ से कान्हा, पेंच, पन्ना और सतपुड़ा तक वन्यजीव बचाव केंद्रों की तैयारी, सिर्फ रेस्क्यू सेंटर होगा
अगला चरण विशेषज्ञों की टीम द्वारा इन जमीनों का निरीक्षण करना है।

HighLights

  1. वन्यजीवों के बचाव और देखरेख के लिए निर्णय
  2. नेशनल जू अथाॅरिटी को भेजा जाएगा प्रस्ताव
  3. उपयुक्त जमीन को दिया जाएगा अंतिम रूप

संजय कुमार शर्मा, नईदुनिया, उमरिया। मध्य प्रदेश में वन्यजीवों के बचाव और देखरेख के लिए अब केवल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व ही नहीं, बल्कि पांच टाइगर रिजर्व में रेस्क्यू सेंटर बनाने की योजना है। इस योजना में बांधवगढ़ के साथ कान्हा, पेंच, पन्ना और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व शामिल हैं।

सभी टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में कई जमीनें चिन्हित

इन केंद्रों के डिजाइन को लेकर विशेषज्ञ योजना बना रहे हैं, वहीं सभी टाइगर रिजर्व में संभावित स्थलों के लिए जमीनें चिह्नित की जा चुकी हैं। अगला चरण विशेषज्ञों की टीम द्वारा इन जमीनों का निरीक्षण करना है।

उपयुक्त जमीन को अंतिम रूप दिया जाएगा

निरीक्षण के बाद उपयुक्त जमीन को अंतिम रूप दिया जाएगा और संबंधित प्रस्ताव नेशनल जू अथाॅरिटी को भेजा जाएगा। प्राधिकरण की अनुमति मिलने के बाद ही रेस्क्यू सेंटर का निर्माण शुरू हो सकेगा।

चिडि़याघर नहीं, सिर्फ रेस्क्यू सेंटर

बांधवगढ़ में रेस्क्यू सेंटर के साथ पहले चिड़ियाघर बनाए जाने की चर्चा भी सामने आई थी, लेकिन प्रस्तावित योजना में चिड़ियाघर का संचालन शामिल नहीं है।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डाॅ. अनुपम सहाय ने बताया कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में चिडि़याघर संचालन की कोई योजना नहीं है। संभवत: रेस्क्यू सेंटर के लिए नेशनल जू अथारिटी से स्वीकृति लेने की प्रक्रिया को लेकर चिड़ियाघर निर्माण की संभावना का भ्रम पैदा हुआ था।

जरूरी है स्वीकृति


बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डाॅ. सहाय ने बताया कि रेस्क्यू सेंटर के लिए नेशनल जू अथारिटी की अनुमति आवश्यक होती है। दरअसल यह अनुमति वाइल्ड एनिमल को अन्य स्थान पर रखने के लिए जरूरी की गई है। रेस्क्यू सेंटर भी टाइगर रिजर्व से अलग क्षेत्र होगा जहां बीमार, घायल और बूढ़े वन्य प्राणियों को उपचार के लिए रखना होगा, जिसके लिए नेशनल जू अथारिटी की अनुमति आवश्यक है।

अनुमति के बिना नहीं पूरा हुआ प्रोजेक्ट

लगभग सात साल पहले बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के खितौली बफर जोन में पर्यटन विभाग के सहयोग से जंगल सफारी का निर्माण शुरू किया गया था। इसके लिए पन्द्रह करोड़ से ज्यादा की राशि का प्रवि‍धान किया गया था। जंगल सफारी के निर्माण में मध्य प्रदेश वन विभाग और पर्यटन विभाग के प्रदेश स्तर के अधिकारियों की सहभागिता थी।

पर्यटकों को यहां सफारी कराई जाएगी

जंगल सफारी को इस उद्देश्य के साथ बनाया जा रहा था कि यहां बूढ़े बाघों को रखा जाएगा। देश और विदेश से आने वाले पर्यटकों को यहां सफारी कराई जाएगी। जबकि इसके लिए नेशनल जू अथाॅरिटी की अनुमति ही नहीं ली गई थी।

अजय दुबे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी थी

इस मामले में वन्यप्राणी एक्टीविस्ट अजय दुबे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी थी, जिसके बाद सफारी के निर्माण में रोक लगा दी गई थी। करोड़ो रूपये खर्च करने के बाद भी वह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका।

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