
संजय कुमार शर्मा, नईदुनिया, उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व को जोड़ने वाला बांधवगढ़-अचानकमार वन्यजीव कॉरिडोर में नीलामी प्रक्रिया के तहत पाली तहसील मे कुल 10 कोयला खदानें स्वीकृत की गई हैं। इनमें शाहपुर वेस्ट, अर्जुनी वेस्ट, अर्जुनी ईस्ट, पथौरा पूर्वी, पथौरा पश्चिमी, मरवाटोला-6, मरवाटोला-7 सहित अन्य कोल ब्लाक शामिल हैं।
इन खदानों का कुल क्षेत्रफल 10,387.165 हेक्टेयर है, जो लगभग 25000 एकड़ होता है। खदान क्षेत्र के 35 गांव भी इससे प्रभावित होंगे। हालांकि एक खदान के आधे हिस्से को छोड़कर बाकी की खदानें अंडरग्राउंड हाेने गांवों को विस्थापित नहीं किया जाएगा।
करीब तीन किलोमीटर चौड़ा यह वन क्षेत्र बाघों सहित अन्य वन्यजीवों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी कॉरिडोर के आसपास कोयला खनन परियोजनाओं को मिल रही मंजूरियों से वन्यजीव संरक्षण को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कॉरिडोर के आसपास चार कोयला परियोजनाओं को पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति से मंजूरी मिली है। इनमें मरवाटोला VII कोल ब्लॉक कॉरिडोर से महज करीब 53 मीटर दूर बताया गया है। यहां ओपनकास्ट और भूमिगत दोनों तरह के खनन का प्रस्ताव है।
पाथोरा ईस्ट अंडरग्राउंड ब्लॉक करीब 1.5 किलोमीटर, अर्जुनी वेस्ट कोल ब्लॉक करीब 3.9 किलोमीटर और वेस्ट ऑफ शहडोल (साउथ) माइन छह किलोमीटर से कुछ अधिक दूरी पर है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार यह कॉरिडोर मध्य भारत के बड़े बाघ परिदृश्य में कनेक्टिविटी बनाए रखने में महत्वपूर्ण है।
इसके माध्यम से बांधवगढ़-संजय-डुबरी क्षेत्र और कान्हा-पेंच परिदृश्य के बीच वन्यजीवों की आवाजाही संभव होती है। बाघों के आवागमन से अलग-अलग आबादियों के बीच आनुवंशिक आदान-प्रदान भी होता है।
टाइगर कॉरिडोर बहुत ज़रूरी हैं क्योंकि इससे जैव-विविधता बनाए रखने, बाघों की आबादी को आपस में प्रजनन करने और जीव-जंतुओं व वनस्पतियों की प्रजातियों की आवाजाही में मदद होती है। कारीडोर वन्यजीवों को एक आवास से दूसरे आवासों तक पहुंच प्रदान करते हैं। प्रजातियों को मुश्किल इलाकों को पार करने में सक्षम बनाते हैं और उनके दायरे को बढ़ाते हैं। इसलिए कारीडोर की सुरक्षा बेहद आवश्यक है।
नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) द्वारा वाइल्डलाइफ़ इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया (ब्ल्यूआईआई) के सहयोग से 2014 में प्रकाशित दस्तावेज़ रिपोर्ट ''कनेक्टिंग टाइगर पॉपुलेशन्स फ़ॉर लॉन्ग-टर्म कंजर्वेशन'' (लंबे समय तक संरक्षण के लिए बाघों की आबादी को जोड़ना) के अनुसार, "बांधवगढ़-अचानकमार कॉरिडोर दो बहुत महत्वपूर्ण उप-परिदृश्यों (सब-लैंडस्केप) को जोड़ता है।
इसी तरह बांधवगढ़ के माध्यम से कान्हा-पेंच (बाघ) आबादी को बांधवगढ़-संजय-दुबरी आबादी से भी जोड़ता है। इस रिपोर्ट को दरकिनार करते हुए कारीडोर के इतने नजदीक कोयला खदानों को स्वीकृति प्रदान किया जाना प्रकृति के साथ सीधे छेड़छाड़ करने जैसा है।
रामा सीमेंट इंडस्ट्रीज प्रा. लि. मरवाटोला-VII कोल ब्लॉक के प्रबंधक अजीत सोढ़ा ने बताया कि खदान बाघ गलियारे के बाहर है और भारत सरकार ने ही खदान की सीमाएं तय की है। नियम के अनुसार पर्यावरणीय स्वीकृति भी खदान को मिल गई है। वन विभाग ने भी अपनी एनओसी प्रदान कर दी है।
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