
नईदुनिया प्रतिनिधि, उमरिया। मध्य प्रदेश पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (पीटीएस) उमरिया में पदस्थ सब इंस्पेक्टर अमिताभ प्रताप सिंह, जिनका पूर्व नाम अमिताभ थियोफिलिस बताया गया है, का गोंड अनुसूचित जनजाति (एसटी) का जाति प्रमाण पत्र राज्य उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने अमान्य कर दिया है।
समिति ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी सेवा प्राप्त करने से जुड़े मामले की सुनवाई और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद यह निर्णय लिया। मामले में शिकायतकर्ता प्रमिला तिवारी उपाध्याय द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के अलावा जबलपुर कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक की जांच रिपोर्ट, स्कूल और चर्च के अभिलेखों को भी परीक्षण में शामिल किया गया।
समिति के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, अमिताभ प्रताप सिंह ने जबलपुर के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय से जारी जाति प्रमाण पत्रों का उपयोग किया था। जांच के दौरान कार्यालय के दायरा पंजी वर्ष 1997-98 को खंगाला गया।
प्रकरण क्रमांक 6745/बी-121/1997-98 का उल्लेख सरकारी रजिस्टर में नहीं मिला। वहीं एसडीएम कार्यालय गोरखपुर, जबलपुर से जारी डिजिटल जाति प्रमाण पत्र को भी पूर्व में निरस्त किया जा चुका था। जांच में प्रमाण पत्रों से संबंधित कई विसंगतियां सामने आईं।
समिति ने सेंट पॉल हायर सेकेंडरी स्कूल, नेपियर टाउन जबलपुर के रिकॉर्ड की भी जांच की। कक्षा पहली से आठवीं तक के स्कॉलर रजिस्टर क्रमांक 113/49 में धर्म/जाति के कॉलम में ‘क्रिश्चियन एसटी’ दर्ज मिला। वहीं कक्षा नौवीं की प्रवेश पंजी क्रमांक 627 में इसी कॉलम में ‘हिंदू’ लिखा हुआ था।
स्कूल मैनेजर डैजल पॉल के बयान के अनुसार, प्रवेश के समय धर्म एवं जाति संबंधी जानकारी अभिभावकों द्वारा मौखिक रूप से दी जाती थी और स्कूल में जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया जाता था। समिति को प्रस्तुत एक प्रति में ‘एसटी’ के साथ ‘गोंड’ शब्द जोड़ा हुआ पाया गया, जिसे समिति ने उपलब्ध मूल रिकॉर्ड के साथ विरोधाभास के रूप में देखा।
गोंड जनजाति से अपने पैतृक संबंध स्थापित करने के लिए प्रस्तुत विवाह प्रमाण पत्रों की भी जांच की गई। इटारसी चर्च तथा सेंट पॉल चर्च जबलपुर से जुड़े विवाह अभिलेखों में जाति का उल्लेख नहीं पाया गया।
दादा राम सिंह कुंजाम और दादी फुलवा मरकाम के वर्ष 1939 के कथित विवाह प्रमाण पत्र में जारीकर्ता का नाम नहीं होने से उसका पुलिस सत्यापन भी नहीं हो सका। वहीं पिता धीरेन्द्र प्रताप सिंह की वर्ष 1989 में हुई मृत्यु का प्रमाण पत्र वर्ष 2020 में बनवाया गया था। समिति ने इसे जाति प्रमाणीकरण के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना।
जबलपुर कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक की जांच रिपोर्ट के अनुसार, अनावेदक के जन्म से क्रिश्चियन धर्म से संबंधित होने की बात सामने आई। जांच में उनके जनजातीय रीति-रिवाज, संस्कृति अथवा गोंड समुदाय से संबंध का पर्याप्त प्रमाण नहीं मिला। साथ ही अनावेदक या उनके पूर्वजों के वर्ष 1950 की स्थिति में जबलपुर अथवा तहसील रांझी के निवासी होने का प्रमाण भी जांच में स्थापित नहीं हो सका।
समिति के अनुसार, अनावेदक अपने परिवार, पिता, दादा अथवा अन्य रिश्तेदार के गोंड जनजाति से संबंधित होने का वैध एवं प्रमाणिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। उपलब्ध अभिलेखों और जांच रिपोर्टों के परीक्षण के बाद उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने पत्र को अमान्य कर दिया।
इस पूरे प्रकरण के बीच एसआई छुट्टी पर चला गया है। इस बारे में चर्चा करते हुए पीटीएस उमरिया की एसपी स्वाती मुराब वाडेकर ने कहा कि उन्हें इस प्रकरण की पूरी जानकारी है लेकिन अभी इससे संबंधित कोई अधिकृत पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। जैसे ही पत्र प्राप्त होता है वे पीएचक्यू की कार्मिक शाखा को इस मामले से संबंधी आवश्यक प्रस्ताव भेजेंगी और यह भी लिखेंगी कि एसआई को यहां अन्यत्र पदस्थ कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि फिलहाल वह अवकाश पर है।
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