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उमरिया में बजरंग इस्पात के कर्मि‍यों पर ग्रामीणों का हमला, मामला न्यायालय में होने के बावजूद काम शुरू

सवाल अब यह है कि आखिर जिस 57.57 एकड़ जमीन को ग्रामीण करीब 50 वर्षों से अपनी खेती और घर-गृहस्थी का आधार बता रहे हैं, उसकी कानूनी स्थिति क्या है?

By SanjayKumar SharmaEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Fri, 02 Oct 2026 10:36:53 PM (IST)Updated Date: Fri, 02 Oct 2026 10:36:53 PM (IST)
उमरिया में बजरंग इस्पात के कर्मि‍यों पर ग्रामीणों का हमला, मामला न्यायालय में होने के बावजूद काम शुरू
खसरा नंबर 42, रकबा 57.57 एकड़ की जमीन पर वे वर्षों से घर बनाकर खेती करते आ रहे हैं। lसौजन्‍य एआई

HighLights

  1. ग्रामीणों ने पहले की थी शिकायत, नहीं हुई सुनवाई
  2. घटना में पांच लोगों के घायल होने का दावा किया
  3. खनन उनकी आजीविका पर सीधा असर डालेगा

नईदुनिया प्रतिनिधि, उमरिया। पाली जनपद के ग्राम गिठौरी में कोयला खनन करने वाली निजी क्षेत्र की कंपनी बजरंग इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के कर्मचारियों पर कुछ ग्रामीणों ने हमला कर दिया है।

इन्‍हें बनाया गया घटना का प्रत्यक्षदर्शी

कंपनी की शिकायत में विजय यादव, शिवम शर्मा, शक्ति प्रताप सिंह, दीपेन्द्र यादव और कमलेश कुमार रैदास के घायल होने का दावा किया गया है। वहीं शशिधर द्विवेदी, श्याम हरदहा, एस.के. गुप्ता, सौरभ मिश्रा और गंगा साहू को घटना का प्रत्यक्षदर्शी बताया गया है।

शिकायत में कर्मचारियों के घायल होने और धमकी

कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट कमर्शियल ने आरोप लगाया कि साइट पर ग्रामीणों ने टीम का विरोध किया और डंडा, हंसिया, कुल्हाड़ी, गैती तथा पत्थर लेकर मारपीट की। शिकायत में कर्मचारियों के घायल होने और धमकी दिए जाने का भी दावा किया गया है।


इन्हें बनाया आरोपी

शिकायत में अरुण सिंह, रामकृष्ण सिंह, राम सिंह, नरेन्द्र सिंह, सोनशाय और विजय के नाम दर्ज हैं। इनके अलावा सुशीला बाई, सुषमा बाई, छोटी बाई, मुन्नी बाई, रामप्यारी बाई, सुमन बाई, नारायण की पत्नी, ज्योति बाई, चन्दा बाई, जानकी बाई, अरुण सिंह की पत्नी, पंचू सिंह की पत्नी और विजय की पत्नी सहित गांव की अन्य महिलाओं का उल्लेख किया गया है।

शिकायत के आधार पर प्रकरण दर्ज

पुलिस ने कंपनी की शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 191(3), 296(b), 115(2) और 351(3) के तहत प्रकरण दर्ज किया है। थाना प्रभारी गोविंद सिंह धुर्वे के अनुसार, कंपनी की शिकायत प्राप्त हुई है और संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीणों भी पहले की थी शिकायत

एक तरफ बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड की टीम ग्रामीणों पर हमला और धमकी के आरोप लगा रही है, तो दूसरी तरफ ग्रामीण पहले ही थाना प्रभारी के नाम आवेदन देकर कंपनी पर उनकी जमीन पर बलपूर्वक कोल माइंस का काम कराने का आरोप लगा चुके थे।

मामला पाली न्यायालय में विचाराधीन है फैसला नहीं हुआ

ग्रामीणों ने अपने आवेदन में स्पष्ट कहा था कि खसरा नंबर 42, रकबा 57.57 एकड़ की जमीन पर वे वर्षों से घर बनाकर खेती करते आ रहे हैं। उनका दावा है कि भूमि संबंधी मामला पाली न्यायालय में विचाराधीन है और अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

कथित खनन कार्य रुकवाने की मांग की थी

ग्रामीणों के अनुसार, आरसीएस ए 32/25, बाबूलाल बनाम शासन प्रकरण न्यायालय में लंबित है और आवेदन में अगली पेशी 27 अक्टूबर 2026 बताई गई है। ग्रामीणों ने इसी आधार पर थाना प्रभारी से कथित खनन कार्य रुकवाने की मांग की थी।

ग्रामीणों का आरोप

ग्रामीणों ने बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड रामपुर, छत्तीसगढ़ के महाप्रबंधक शशिधर द्विवेदी पर आरोप लगाया है कि न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद मजदूरों के जरिए जमीन पर कोल माइंस का काम कराया जा रहा है। आवेदन में विरोध करने पर झगड़े और झूठे केस में फंसाने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया।

खनन आजीविका पर सीधा असर डालेगा

ग्रामीणों का कहना है कि उनके घर और खेती की जमीन पर खनन उनकी आजीविका पर सीधा असर डालेगा। कंपनी अपनी ओर से भूमि को कोयला उत्खनन के लिए आवंटित होने की बात कह रही है। ऐसे में आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर भूमि रिकॉर्ड, न्यायालयीन दस्तावेज और खनन संबंधी सरकारी अनुमतियों की निष्पक्ष जांच ही इस पूरे विवाद की असली तस्वीर सामने ला सकती है।

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